डिंडौरी में नर्मदा नदी किनारे खड़ी गाड़ियों की छतों पर बर्फ की सफेद चादर जमी हुई मिली। मंगलवार सुबह साकेत नगर में इसका वीडियो सामने आया है। पिछले कई दिनों से जिले का न्यूनतम तापमान 6 से 7 डिग्री सेल्सियस बना हुआ है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में तापमान में और गिरावट का अनुमान जताया है। स्थानीय निवासी शुभम पांडे ने बताया कि मंगलवार सुबह जब वे बैडमिंटन खेल रहे थे, तब उन्होंने एक कार की छत पर बर्फ की परत जमी देखी। नर्मदा नदी के किनारे होने के कारण इस क्षेत्र में ठंड का असर अधिक देखा जा रहा है। नगर परिषद ने ठंड से बचाव के लिए जगह-जगह अलाव की व्यवस्था की है, ताकि रात में रुकने वाले यात्रियों को राहत मिल सके। कड़ाके की ठंड के कारण मॉर्निंग वॉक पर निकलने वाले लोगों की संख्या में भी कमी आई है। लोग ठंड से बचने के लिए घरों में रजाई और हीटर का सहारा ले रहे हैं। लगातार बढ़ती ठंड और तापमान में गिरावट के कारण फसलों पर पाला पड़ने की संभावना बढ़ गई है। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को पाले से बचाव के लिए आवश्यक उपाय अपनाने की सलाह दी है, ताकि संभावित नुकसान से बचा जा सके। शीतलहर और ठंड के कारण पाला पड़ने की आशंका कृषि वैज्ञानिक डॉ. अवधेश पटेल ने बताया कि शीतलहर और अत्यधिक ठंड के कारण पाला पड़ने की आशंका बढ़ जाती है। उत्तर और पश्चिम से आने वाली ठंडी हवाएं तथा बर्फबारी तापमान में गिरावट लाती हैं, जिससे फसलों और उद्यानिकी फसलों पर पाला पड़ने का खतरा बढ़ जाता है। इन फसलों पर पड़ेगा प्रभाव पाला विशेष रूप से दिसंबर और जनवरी के महीनों में अधिक पड़ने की संभावना रहती है। इसके प्रभाव से मुख्य रूप से टमाटर, बैंगन, आलू, फूलगोभी, मिर्च, धनिया, पालक जैसी उद्यानिकी फसलें प्रभावित होती हैं। फसलों में मसूर, चना, सरसों और कुछ हद तक गेहूं, जौ भी प्रभावित हो सकते हैं, खासकर जब वे फूल और फल की अवस्था में हों। डॉ. पटेल ने किसानों को सलाह दी है कि वे समय रहते इन उपयोगी उपायों को अपनाकर अपनी फसलों को पाले के प्रभाव से काफी हद तक बचा सकते हैं।


