चंडीगढ़ निगम की आज साल की अंतिम हाउस बैठक:मेयर चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज, प्रशासक गुलाब चंद कटारिया रहेंगे मौजूद

चंडीगढ़ नगर निगम की इस साल की अंतिम हाउस बैठक आज होने जा रही है, जिसे सियासी दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है। खास बात यह है कि बैठक में पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया विशेष रूप से शामिल होंगे। यह बैठक ऐसे समय हो रही है, जब शहर में मेयर चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां चरम पर हैं और हर दल की नजर पार्षदों की संख्या व उनकी निष्ठा पर टिकी हुई है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि बैठक के बहाने पर्दे के पीछे जोड़-तोड़ की राजनीति भी तेज हो सकती है। बैठक की टाइमिंग ने सत्ता पक्ष भाजपा और विपक्षी गठबंधन आम आदमी पार्टी-कांग्रेस, दोनों की चिंता बढ़ा दी है। मेयर की कुर्सी को लेकर भाजपा पहले ही आम आदमी पार्टी की दो महिला पार्षदों को अपने खेमे में शामिल कर चुकी है, जबकि अन्य विपक्षी पार्षदों को साधने के प्रयास भी जारी बताए जा रहे हैं। हालांकि, भाजपा के भीतर यह आशंका भी बनी हुई है कि कहीं खींचे गए पार्षदों का रुख दोबारा न बदल जाए। कांग्रेस को भी डरा रहा डर आम आदमी पार्टी अपने दोनों पार्षदों को फिर से पार्टी में वापस लाने की कोशिश कर रही है। वहीं, आप और कांग्रेस दोनों को यह डर सता रहा है कि भाजपा उनके खेमे में और सेंधमारी कर सकती है। यही वजह है कि तीनों दलों का शीर्ष नेतृत्व सदन की गैलरी से पार्षदों की गतिविधियों पर पैनी नजर बनाए रखेगा। कुल मिलाकर, यह बैठक मेयर चुनाव की जमीन तैयार करने के साथ-साथ किसी का खेल बना भी सकती है और बिगाड़ भी सकती है। मेयर चुनाव के आसपास होने वाली निगम बैठकों में पहले भी कई बार “सेटिंग” की राजनीति के आरोप लगते रहे हैं। कब किस पार्षद का मन बदल जाए, यह कहना मुश्किल होता है। हालांकि, सभी दलों ने अपने-अपने पार्षदों को एकजुट रहने का संदेश दे दिया है, लेकिन असली परीक्षा सदन के भीतर होगी। विकास प्रस्तावों के साथ सियासत भी हावी सियासत के अलावा शहर के विकास से जुड़े कई अहम प्रस्तावों के चलते भी यह बैठक महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सबसे ज्यादा नजर इस बात पर रहेगी कि प्रशासक गुलाब चंद कटारिया अपने संबोधन में निगम के लिए कोई बड़ी घोषणा करते हैं या नहीं। यदि कोई बड़ी घोषणा होती है, तो भाजपा और मौजूदा मेयर हरप्रीत कौर बबला इसे अपनी बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश करने की कोशिश कर सकती हैं। भाजपा 18, आप-कांग्रेस 17 नगर सांसद की गैरमौजूदगी में भाजपा के पास 18 पार्षद होंगे, जबकि आम आदमी पार्टी-कांग्रेस गठबंधन 17 पार्षदों के साथ सदन में मौजूद रहेगा। वर्ष 2022 के बाद यह पहला मौका होगा, जब निगम सदन में भाजपा के पास सबसे ज्यादा पार्षद होंगे। किसी भी प्रस्ताव पर वोटिंग की स्थिति में भाजपा का पलड़ा भारी रहेगा। ऐसे में विपक्ष के पास वॉकआउट के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा। आप छोड़कर भाजपा में गईं दोनों महिला पार्षदों के समर्थन से सत्ता पक्ष को प्रस्ताव पारित कराने में आसानी हो सकती है। निगम सदन में चंडीगढ़ के सांसद मनीष तिवारी इस बैठक में शामिल नहीं होंगे।, इसलिए सदन में 18-18 की बराबरी होने की कोई संभावना नहीं रहेगी।मनीमाजरा के पॉकेट नंबर-6 पर रहेगी नजर बैठक में मनीमाजरा के विवादित पॉकेट नंबर-6 से जुड़ा कोई टेबल एजेंडा आता है या नहीं, इस पर भी सभी की निगाहें रहेंगी। यह परियोजना मेयर का ड्रीम प्रोजेक्ट मानी जा रही है, जिस पर सीनियर डिप्टी मेयर पहले ही सवाल उठा चुके हैं। सूत्रों के मुताबिक, इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष भाजपा के भीतर भी पूरी एकजुटता नहीं है। बैठक में आने वाले प्रमुख प्रस्ताव सप्लीमेंट्री एजेंडा के अहम प्रस्ताव

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