छिंदवाड़ा के हर्रई क्षेत्र में सरकारी नौकरी बचाने के लिए परिवार तोड़ने का अजीबोगरीब मामला सामने आया है। यहां पदस्थ एक आश्रम अधीक्षक पर आरोप है कि तीन संतान होने पर नौकरी पर आंच न आए, इसलिए उन्होंने अपनी तीसरी संतान (बेटी) को समग्र आईडी में दर्ज नहीं कराया। जब दूसरी पत्नी ने इसका विरोध किया, तो अधीक्षक उसे छोड़कर वापस पहली पत्नी के पास चले गए। पीड़ित महिला ने सोमवार को कलेक्ट्रेट की जनसुनवाई में गुहार लगाई है। पहली पत्नी से 2 बच्चे, दूसरी से एक बेटी मामला आश्रम अधीक्षक कैलाश सूर्यवंशी से जुड़ा है। उन्होंने अपनी पहली पत्नी शक्ति को तलाक देने के बाद छिंदवाड़ा निवासी सुषमा से दूसरी शादी की थी। पहली पत्नी से उनके दो बच्चे हैं, जबकि दूसरी पत्नी से एक बेटी है। सरकारी नियमों के मुताबिक, दो से ज्यादा संतान होने पर नौकरी पर खतरा हो सकता है। आरोप है कि इसी डर से कैलाश ने दूसरी पत्नी की बेटी का नाम सरकारी रिकॉर्ड (समग्र आईडी) में नहीं जुड़वाया। समग्र ID के बिना रुकी बेटी की पढ़ाई पीड़ित सुषमा सूर्यवंशी ने बताया कि जब उन्होंने बेटी का नाम जोड़ने के लिए पति पर दबाव बनाया, तो उन्होंने साथ छोड़ दिया और वापस पहली पत्नी के पास रहने चले गए। अब सुषमा के सामने जीवन-यापन का संकट है। समग्र आईडी में नाम न होने से बेटी स्कूल नहीं जा पा रही है। उन्होंने प्रशासन से मदद की मांग की है। मामला कोर्ट में है इस मामले में कैलाश सूर्यवंशी का कहना है कि पूरा प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन है। हालांकि, तीसरी संतान को रिकॉर्ड में दर्ज न कराने के सवाल पर उन्होंने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया।


