झारखंड के गुड़ाबांदा में पन्ना के बाद अब प्रखंड के कन्यालुका गांव में यूरेनियम का भंडार मिला है। परमाणु खनिज अन्वेषण एवं अनुसंधान निदेशालय, परमाणु ऊर्जा विभाग ने इस क्षेत्र में सर्वेक्षण की तैयारी शुरू कर दी है। कन्यालुका गांव में 17.78 एकड़ भूमि पर सर्वेक्षण किया जाएगा। इसमें 5.05 एकड़ वन भूमि, 7.54 एकड़ सरकारी और शेष रैयती जमीन है। रैयती जमीन के मालिकों में कांदरो संथाल, वैद्यनाथ संथाल, दासो संथाल व रामजीत संथाल शामिल हैं। परमाणु खनिज निदेशालय ने इस क्षेत्र से सतह के नमूनों को इकट्ठा करने और परीक्षण करने की योजना बनाई है। गुड़ाबांदा सीओ मनोहर लिंडा ने कहा है कि यूरेनियम का भंडार मिला है। सर्वे के लिए रैयतदारों को जानकारी दी गई है। ग्राम प्रधान गोविंद टुडू और ग्रामीणों को सूचना दी गई है। यहां से मिट्टी के नमूने लिए जाएंगे। सर्वेक्षण के परिणाम न केवल स्थानीय विकास को गति देंगे, बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूत करेंगे। हेली-बोर्न भू-भौतिकी तकनीक से हुई यूरेनियम की पुष्टि यूरेनियम की पुष्टि के लिए हेली-बोर्न भू-भौतिकी तकनीक का उपयोग कर इस क्षेत्र का सर्वेक्षण किया गया था। इस तकनीक में हेलीकॉप्टर से जमीन से 500 मीटर की गहराई तक 3डी तस्वीर ली जाती है। जमीन के नीचे की संरचना का विस्तृत अध्ययन होता है। भारतीय वैज्ञानिक अनुसंधान परिषद और राष्ट्रीय भू-भौतिकी अनुसंधान संस्थान द्वारा विकसित यह तकनीक यूरेनियम भंडार की पहचान में अत्यधिक कारगर सिद्ध हुई है। नरवा पहाड़ में मिल चुका है भंडार
इससे पहले जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने नरवा पहाड़ के गुर्रा नदी के पास प्रमुखनगर गांव के पास यूरेनियम का भंडार खोजा था। हालांकि, यहां अभी उत्पादन की पहल शुरू नहीं हुई है। परमाणु ऊर्जा विभाग के अनुसार, राजस्थान के रोहिल में भी यूरेनियम का भंडार मिला है। वहां प्रोडक्शन को लेकर प्रक्रियाएं जारी है। पर्यावरण स्वीकृति मिलने के बाद उत्पादन शुरू हो सकता है। झारखंड में यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के तहत कुल 7 सक्रिय खदानें हैं। गुड़ाबांदा में 2013 में मिला था पन्ना
घाटशिला अनुमंडल से 70 किमी दूर ओडिशा सीमा से सटे गुड़ाबांदा में खान एवं भूतत्व विभाग ने 2013 में ही पन्ना के विशाल भंडार का पता लगाकर सरकार को रिपोर्ट सौंपी थी। इसके बाद पन्ना खदान चलाने का निर्णय लिया गया था। अक्टूबर 2019 में एनएमडीसी की टीम ने भौतिक सर्वेक्षण किया था। हालांकि, एनएमडीसी ने इस इलाके में खनन करने से मना कर दिया था। इसके बाद 2020-21 और 2022-23 में भी भूतत्व विभाग ने सर्वे किया था। टेस्ट से पता चला था कि यहां पन्ना है।


