रांची नगर निगम बोर्ड का कार्यकाल 20 माह पहले समाप्त हो गया था। इतने दिनों से नगर निकाय चुनाव नहीं होने से जनप्रतिनिधियों की भूमिका समाप्त हो गई है। इसका सीधा असर आम लोगों पर पड़ रहा है। क्योंकि, गली-मुहल्ले के हर छोटे-बड़े काम के लिए लोगों को बोर्ड नगर निगम के चक्कर लगाना पड़ रहा है। दूसरी ओर, नगर निगम में हर काम अफसरों की मर्जी से हो रहे हैं। जनप्रतिनिधियों के नहीं रहने से कोई रोकने या सवाल उठानेवाला नहीं है। ऐसे में छोटे से लेकर ऊपर स्तर के पदाधिकारी-कर्मचारी अपने हिसाब से काम कर रहे हैं। जो काम हो रहे हैं, उसका आम जनता पर क्या दुष्प्रभाव पड़ेगा, यह सोचनेवाला कोई नहीं है। अफसर जहां चाह रहे वहीं सड़क-नाली बन रही है। नियमों को बदल कर बस टर्मिनल का ठेका तीन वर्ष के लिए दे दिया गया। जनप्रतिनिधियों ने जिन इंफोर्समेंट कर्मचारियों पर वसूली का आरोप लगाकर हटाने की मांग की, उनको हटाने के 15 माह बाद दुबारा बहाल कर लिया। देखिए कैसे चल रही अफसरों की मर्जी… जानिए… जिन योजनाओं को रांची नगर निगम बोर्ड ने रोका था, उन्हें निगम के अफसरों ने स्वीकृति दे दी 1. बस टर्मिनल के टेंडर का नियम बदला, 3 साल के लिए दे दिया खादगढ़ा बस टर्मिनल के टेंडर को लेकर लंबे समय तक विवाद रहा। निगम बोर्ड ने अप्रैल 2023 में हुई बैठक में बस टर्मिनल के टेंडर के लिए नियम बदलने और टोल टैक्स बढ़ाने के प्रस्ताव पर चर्चा करने से इंकार कर दिया था। बोर्ड का कार्यकाल समाप्त होने के बाद निगम के पदाधिकारियों ने टेंडर के नियम ही बदल दिए। सालाना टेंडर करने के बजाय 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ तीन साल के लिए टेंडर कर दिया गया। टैक्स भी बढ़ा दिया। 2. इंफोर्समेंट कर्मियों की वसूली से शहर था परेशान, दोबार किया बहाल शहर को अतिक्रमण मुक्त करने, आम लोगों की समस्याओं का समाधान करने के उद्देश्य से निगम में पहले 19 इंफोर्समेंट कर्मचारियों को बहाल किया गया था। इसके बाद निगम ने 30 नए इंफोर्समेंट कर्मचारियों को फिर बहाल किया। इनको खाकी वर्दी दे दी। पूरे शहर में भयादोहन शुरू हो गया। 15 माह पहले वसूली का मामला सामने आने के बाद हाईकोर्ट के आदेश पर इंफोर्समेंटकर्मियों को हटा दिया गया था। लेकिन दुबारा गुपचुप तरीके से उन्हें बहाल कर लिया गया। 3. 110 सड़कें दो साल से जर्जर, कुछ के ही निकले टेंडर शहर के 53 वार्डों की करीब 110 सड़कें पिछले दो साल से जर्जर हैं। उबड़- खाबड़ सड़क से चलना लोगों की मजबूरी है। नाली नहीं होने से गंदा पानी सड़कों पर ही बहता है। निगम चुनाव होने से सभी वार्ड के पार्षदों के बीच फंड का बंटवारा होता था। उसी अनुसार पार्षद अपने क्षेत्र में काम कराते थे। अब निगम के इंजीनियर तय करते हैं कि कहां सड़क-नाली बनानी है। पिछले दिनों मात्र 35 सड़कों का टेंडर निकाला गया। ये योजनाएं अटकीं… अल्बर्ट एक्का चौक पर फुट ओवरब्रिज अल्बर्ट एक्का चौक के पास गोल फुटओवर ब्रिज बना रहे थे। इसके लिए जलापूर्ति पाइप शिफ्ट करने, पिलर आदि पर करीब 75 लाख रुपए खर्च कर दिए। सांसद महुआ माजी, केंद्रीय मंत्री संजय सेठ, विधायक सीपी सिंह के विरोध के बाद निर्माण रोका। अपर बाजार में मार्केट सह पार्किंग अपर बाजार बोर्ड जाममुक्त करने के लिए बकरी बाजार में मार्केटिंग कांप्लेक्स सह मल्टी लेवल पार्किंग बनाना था। योजना 2022 में ही स्वीकृत थी, लेकिन काम शुरू नहीं हुआ। मार्केट बनने से 100 से अधिक लोगों को रोजगार के लिए जगह मिलती। वेंडर कमेटी ठप, वेंडिंग जोन नहीं बना नगर निगम चुनाव नहीं होने की वजह से स्ट्रीट वेंडरों को व्यवस्थित करने की योजना भी ठप पड़ गई। वेंडर मार्केट में जगह आवंटन में मनमानी हो रही है। नया वेंडिंग जोन बनाने की योजना पर काम नहीं हुआ। कचहरी रोड से सर्जना चौक तक घोषित नो वेंडिंग जोन में दुबारा दुकानें लग रही है।


