खरगोन की भीकनगांव मंडी में भारतीय कपास निगम (सीसीआई) द्वारा कपास की खरीद बंद किए जाने के विरोध में किसानों ने मंगलवार को प्रदर्शन किया। दोपहर करीब 12 बजे 150 से अधिक किसानों ने खंडवा-बड़ोदरा हाईवे पर लेटकर धरना दिया और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। किसानों ने मांग की कि खरगोन की तरह भीकनगांव में भी कपास की खरीद जारी रखी जाए। मंडी में इस समय 100 से अधिक वाहन और बैल गाड़ियां कपास की नीलामी के लिए खड़े हैं। एक दिन पहले खरगोन में भी इसी तरह का हंगामा हुआ था, जिसके बाद किसानों के आंदोलन के बाद रात में कपास की खरीद फिर से शुरू की गई थी। भीकनगांव में हंगामे की सूचना पर पुलिस और राजस्व कर्मचारी मौके पर पहुंचे और किसानों को समझाने का प्रयास किया। कपास निजी व्यापारियों को बेचना पड़ेगा
किसानों को आशंका है कि सीसीआई की खरीद बंद होने से उन्हें अपना कपास निजी व्यापारियों को बेचना पड़ेगा, जिससे उन्हें कम भाव मिलने की संभावना है। सगुर भगुर के किसान विजय पटेल ने बताया कि बड़ी मुश्किल से स्लॉट बुकिंग हुई थी और वे सोमवार शाम को ही कपास लेकर मंडी पहुंचे थे, लेकिन अचानक खरीद बंद कर दी गई। किसानों का कहना है कि हजारों किसानों के स्लॉट पहले से ही बुक थे और तय तारीख पर वे कपास लेकर आए थे, तब उन्हें खरीद बंद होने की सूचना दी गई। किसानों ने आरोप लगाया कि खरीद बंद करने से दो-तीन दिन पहले सूचना दी जानी चाहिए थी। उन्हें एक वाहन का भाड़ा 2500 से 3000 रुपए लग रहा है, जो अब व्यर्थ जाएगा। मंडी प्रशासन ने सोमवार शाम को स्थानीय मंडियों में सीसीआई की खरीद नहीं करने संबंधी निर्देश जारी किए थे। किसानों का कहना है कि उन्हें यह सूचना तब मिली जब बड़ी संख्या में किसान पहले से ही बुक की गई तारीख पर कपास लेकर मंडी पहुंच चुके थे। इसलिए उनकी मांग है कि खरगोन की तरह उनके कपास की भी खरीद की जाए।


