प्रतापसागर से प्रशासन ने 7 बीघा जमीन से हटाया कब्जा:3 बीघा में बना तबेला ढहाने के बाद अब आसपास के मकान भी रडार पर

नागौर शहर के प्रतापसागर क्षेत्र में चार दिनों से चल रहा विवाद आज एक बड़े प्रशासनिक ऑपरेशन में बदल गया है। पुलिस और प्रशासन की मौजूदगी में नगर परिषद द्वारा सरकारी जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने की कार्रवाई अभी भी मौके पर लगातार जारी है। प्रशासन ने अब तक सात बीघा से अधिक बेशकीमती भूमि को अपने कब्जे में ले लिया है, जिसमें स्थाई और अस्थाई दोनों तरह के निर्माण शामिल हैं। ​अभियान के दौरान नगर परिषद की पांच जेसीबी मशीनों ने क्षेत्र में बने एक विशाल तबेले को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है, जो करीब तीन बीघा जमीन पर अवैध रूप से फैला हुआ था। जैसे-जैसे कार्रवाई आगे बढ़ रही है, प्रशासन का शिकंजा और कसता जा रहा है। मौके पर मौजूद उपखण्ड अधिकारी (एसडीएम) गोविन्द भींचर ने अब आसपास बने मकानों की जांच भी शुरू कर दी है। उन्होंने सख्त निर्देश दिए हैं कि पड़ोस के सभी मकान मालिक तुरंत अपने वैध पट्टे और दस्तावेज़ पेश करें। एसडीएम ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि पट्टे नहीं दिखाने की स्थिति में उन निर्माणों को भी अतिक्रमण माना जाएगा और उन पर भी पीला पंजा चलाया जाएगा। ​गौरतलब है कि यह वही जमीन है जिसे लेकर चार दिन पहले माली समाज और भूमाफियाओं के बीच हिंसक टकराव और पथराव की स्थिति बनी थी। आज दोपहर तीन बजे की समय सीमा समाप्त होते ही कोतवाली थानाधिकारी वेदपाल शिवरान और भारी पुलिस बल की सुरक्षा के बीच यह बड़ा एक्शन शुरू हुआ। फिलहाल मौके पर तनावपूर्ण शांति बनी हुई है और नगर परिषद का दस्ता एक-एक कर अवैध निर्माणों को ढहाने में जुटा है। अधिकारियों का कहना है कि जब तक पूरी जमीन और आसपास का संदिग्ध क्षेत्र साफ नहीं हो जाता, तब तक यह अभियान जारी रहेगा।

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