घर से सरेआम स्कूटी ले जाने के कारण महिला और एसीबी कोर्ट के पूर्व जज में विवाद हुआ था। महिला के भाई को धमकाने के बाद पूर्व जज और उसके दो सहकर्मियों पर किशोर से यौन दुराचार केस दर्ज कराया गया। ऐसे में ट्रायल कोर्ट ने केस के पीछे महिला की गहन आपराधिक मंशा मानी है। जिसका मास्टर माइंड कथित पीड़ित का मामा था। कथित पीड़ित की गवाही भी बनावटी मानी। एक महिला ने सवा तीन साल पहले अपने नाबालिग बेटे से दुष्कर्म की एफआईआर दर्ज कराई थी। जिसमें कोर्ट के तत्कालीन जज जीतेन्द्र सिंह गुलिया, क्लर्क अंशुल सोनी और राहुल कटारा पर आरोप थे। विशेष न्यायालय (पोक्सो) संख्या दो के न्यायाधीश अखिलेश कुमार के फैसले के अनुसार वारदात पता लगने के बाद आरोपियों से मां की बातचीत में दुष्कर्म का कोई हवाला नहीं था। कोर्ट ने लिखा कि ऐसा किसी भी प्रकार से संभव नहीं है कि पता लगने के बाद भी मां आरोपियों से बातचीत करे। तीन दिन बाद एफआईआर कराई। ऐसा कतई संभव नहीं माना जा सकता कि यौन-दुराचार हो जाए और रिपोर्ट करने में देरी की जाए। प्रकरण का मुख्य सूत्रधार कथित पीड़ित का मामा राजीव था। माफी मांगने के बाद राजीव को धमकी दिए जाने के कारण एफआईआर दर्ज करवाई गई। एफआईआर भी उसी ने लिखी लेकिन आईओ उसकी गवाही नहीं करा पाया। मां और स्वतंत्र गवाह प्रेमपाल सिंह की गवाही से असली विवाद सरेआम स्कूटी ले जाना सामने आया। दुष्कर्म का नहीं मिला सबूत ट्रायल में आई मेडिकल एविडेंस के अनुसार कथित पीड़ित से उन दिनों दुष्कर्म नहीं हुआ था। कथित पीड़ित ने मुख्य आरोपी गुलिया द्वारा शराब पिलाना बताया। उसके भाई के बयानों से सामने आया कि कथित पीड़ित कभी नशे की हालत में घर नहीं आया। कोर्ट ने लिखा कि ऐसा संभव नहीं कि कोई शराब पीकर घर आए और परिजनों को पता ही नहीं चले। मुख्य आरोपी का बनाया कथित अश्लील वीडियो भी नहीं मिला। कथित पीड़ित के मामा को माना मास्टर माइंड, आरपीएस की जांच पर भी कोर्ट ने उठाया सवाल ना लोकेशन मिली, ना तारीख पीड़ित ने पुलिस को 21-22 अक्टूबर 2021 को दुष्कर्म होना बताया। इन दिनों आरोपी सोनी की लोकेशन मौके पर नहीं मिली। कोर्ट में वारदात 11 अक्टूबर की बताई। कोर्ट ने लिखा कि पॉलिग्राफ टेस्ट की अर्जी देने से भी आरोपी की निर्दोषता सामने आती है । विभागीय जांच में कटारा द्वारा दुष्कर्म करने से स्पष्ट इंकार किया। मजिस्ट्रेट के लिए बयानों में भी इस बारे में कोई तथ्य नहीं था। ऐसे में उसकी गवाही विश्वसनीय नहीं । आरपीएस से ऐसी उम्मीद नहीं – कोर्ट आरपीएस सतीश वर्मा के खिलाफ लिखा कि उनके जैसे वरिष्ठ पुलिस अधिकारी से उम्मीद नहीं की जा सकती कि केवल शिकायतकर्ता के जुटाए सबूतों पर विश्वास करेंगे। अपने स्तर पर स्वतंत्र अनुसंधान नहीं करेंगे। उन्हें कथित अश्लील वीडियो पर एक्सपर्ट से रिपोर्ट लेनी चाहिए थी। ना कॉल रिकॉर्डिंग की ट्रांस्क्रिप्ट खुद तैयार की, ना वाट्स एप चैट खुद देखी।


