अजमेर के केंद्रीय बस स्टैंड के पीछे झाड़ियों में 10 जनवरी को लावारिस व घायल हालत में मिली नवजात बालिका की स्थिति में अब सुधार हो रहा है। नवजात बालिका के जख्म भी भरने लगे हैं। जेएलएन अस्पताल के पीडियाट्रिक यूनिट के आईसीयू की टीम बालिका की देखरेख कर रही है। नर्सिंग स्टाफ इसके लिए बाकायदा अलग से टाइम निकाल रहा है। बच्ची को खुशी नाम दिया गया है। नर्सिंग स्टाफ का कहना है कि जन्म लेते ही इस नवजात ने ऐसे जख्म देखे हैं, इसी कारण इसका नाम सभी ने खुशी रखा है। खुशी को खिलाने-सहलाने की जिम्मेदारी सभी ने अलग-अलग ले रखी है। उपअधीक्षक डॉ. अमित यादव ने बताया कि बालिका के घाव भरने के साथ ही ऑक्सीजन धीरे धीरे हटाकर यह जांच की जा रही है कि वह बिना ऑक्सीजन के भी रह सकती है या नहीं। चिकित्सकों की एक टीम भी लगातार रिपोर्ट ले रही है। अभी तक की जांच में सामने आया कि बच्ची का जन्म घर पर ही हुआ होगा। यदि किसी अस्पताल में प्रसव हुआ होता तो पैर में जन्म के समय लगाया जाने वाला निशान जरूर होता। वहीं पुलिस मामले की जांच कर रही है।


