राजगढ़ में लापरवाही पर कलेक्टर सख्त:संवाद से समाधान में सीएमओ को नोटिस, वेतनवृद्धि रोकी और वेतन कटौती के आदेश

राजगढ़ जिले में शासकीय योजनाओं के लंबित मामलों और नागरिकों को भटकाने की शिकायतों पर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। मंगलवार को कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा की अध्यक्षता में ‘संवाद से समाधान’ कार्यक्रम के दौरान लापरवाही उजागर होने पर नगर परिषद पचोर के सीएमओ को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। इसके साथ ही, शाखा प्रभारी की एक वेतनवृद्धि रोकने और कंप्यूटर ऑपरेटर का सात दिन का वेतन काटने के निर्देश दिए गए। यह कार्रवाई संबल योजना से जुड़े प्रकरणों में देरी और लापरवाही के चलते की गई। संतोषजनक जवाब न मिलने पर तत्काल कार्रवाई
कार्रवाई का एक मुख्य मामला स्वर्गीय बद्रीलाल जाटव की मृत्यु के बाद अंत्येष्टि सहायता से संबंधित था। फरवरी 2025 में आवेदन देने के बावजूद, यह प्रकरण महीनों तक लंबित रखा गया। सुनवाई के दौरान संतोषजनक जवाब न मिलने पर कलेक्टर ने तत्काल कार्रवाई के आदेश दिए। कलेक्टर डॉ. मिश्रा ने स्पष्ट किया कि मृतक के परिजनों को कार्यालयों के चक्कर लगवाना गंभीर लापरवाही है और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों को दंडित किया जाना आवश्यक है। कार्यक्रम में संबल योजना से जुड़े अन्य मामलों में भी अव्यवस्थाएं सामने आईं। एक शिकायत में बताया गया कि सामान्य मृत्यु के बाद पात्र हितग्राही को लंबे समय तक लाभ नहीं मिला। कलेक्टर ने संबंधित जनपद पंचायत के अधिकारियों को फटकार लगाते हुए जिम्मेदारी तय करने और तय समय में प्रकरण निपटाने के निर्देश दिए। अंत्येष्टि सहायता में देरी पर चेतावनी दी
एक अन्य मामले में, सड़क दुर्घटना में मृत युवक के प्रकरण में तकनीकी खामी के कारण भुगतान अटका हुआ था। इस पर कलेक्टर ने अधिकारियों से सवाल करते हुए कहा कि तकनीकी कारणों की आड़ में मानवीय मामलों को टालना स्वीकार्य नहीं है। वहीं, एक प्रकरण में एफआईआर तय समय-सीमा के बाद दर्ज होने के कारण संबल पोर्टल पर आवेदन स्वीकृत नहीं हो पा रहा था। इस स्थिति में कलेक्टर ने प्रक्रिया की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को भविष्य में ऐसे मामलों में समय पर मार्गदर्शन देने के निर्देश दिए। नगर पालिका नरसिंहगढ़ से जुड़े एक अन्य प्रकरण में भी अंत्येष्टि सहायता में देरी पाए जाने पर अधिकारियों को चेतावनी दी गई। कलेक्टर ने साफ किया कि ‘संवाद से समाधान’ केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि जवाबदेही तय करने का मंच है, और लापरवाही करने वाले अधिकारी-कर्मचारी कार्रवाई से बच नहीं पाएंगे।

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