खुद का स्टार्टअप कर बिजनेस सेट करने का सपना लेकर चले एक युवा ने कुछ ही महीनों में इसे हासिल कर लिया। अब यह युवा सुर्खियों में है। उसने कश्मीर में उगने वाली केसर को अजमेर में एक कमरे में उगाकर दिखा दिया है। यह कमाल किया है अजमेर के कुंदननगर में रहने गुरकीरत सिंह ब्रोका (35) ने। केसर एक खास पौधा है जो ठंडे इलाकों में होता है। भारत में यह सिर्फ जम्मू-कश्मीर में होता है। गुरकीरत ने केसर को लेकर स्टडी की और अजमेर में कमरे में 2 टन का एसी लगाकर केसर के अनुकूल वातावरण तैयार कर दिया। उन्हें केसर उगाने में सफलता मिली। अब वे इसे बड़े स्तर पर करने का प्लान कर रहे हैं। अपने इस स्टार्टअप के लिए गुरकीरत ने 12 लाख का जॉब ऑफर भी ठुकरा दिया। म्हारे देस की खेती में इस बार बात अजमेर के युवा किसान गुरकीरत सिंह ब्रोका की… गुरकीरत ने बताया- मेरे पिता जोसेंद्र सिंह ब्रोका अजमेर के जेएलएन हॉस्पिटल में डॉक्टर थे। साल 2019 में उनका निधन हो गया। मां हरविंद्र कौर (67) हाउसवाइफ हैं। पापा के जाने के बाद मां की जिम्मेदारी मुझ पर आ गई। हालांकि, मैं कहीं भी नौकरी करने के लिए फ्री था। लेकिन मां अजमेर में ही थीं। मैं चाहता था कि मैं घर से ही कोई काम करूं। मेरी स्कूलिंग अजमेर से ही हुई थी। इसके बाद बीटेक इलेक्ट्रिकल से ग्रेजुएशन किया। इसके बाद एसपी जैन कॉलेज मुंबई से एमबीए किया। एमबीए करने के दौरान ही मुझे एक कंपनी ने मुंबई में 12 लाख की जॉब ऑफर की। लेकिन पिता के निधन के बाद मैं अजमेर ही आ गया। कोरोना के बाद मैंने देखा कि हेल्थ बहुत बड़ा इश्यू है। मैं हेल्दी और ऑर्गेनिक फूड की खेती से जुड़ा कोई बिजनेस स्टार्ट करना चाहता था। जिसकी खपत देश के कोने-कोने में की जा सके। जानकारी मिली कि केसर की खपत भारत में ही 100 टन से ज्यादा है और उत्पादन कश्मीर में होता है जो करीब 3 से 7 टन तक है। भारत को अफगानिस्तान, ईरान, आस्ट्रेलिया, स्पेन से इंपोर्ट करना पड़ता है। ऐसे में तय कर लिया कि केसर का ही बिजनेस करूंगा। मैंने केसर को लेकर रिसर्च करना शुरू कर दिया। केसर भारत में सिर्फ जम्मू और कश्मीर में होता है। मैंने इसकी खेती अजमेर में करने का प्लान बनाया। 2024 की शुरुआत में कश्मीर गया गुरकीरत ने बताया- केसर की खेती को लेकर रिसर्च वर्क तो काफी समय से चल रहा था, लेकिन 2024 में मैंने कश्मीर जाकर केसर की खेती को नजदीक से देखा और पौधे की ग्रोथ को समझने की कोशिश की। वहां पर बीज देखे। वहां बीज का भाव साइज के अनुसार 400 रुपए किलो से लेकर 5000 रुपए किलो था। मैं 100 किलो बीज खरीद कर लाया। साथ ही इसे उगाने के बारे में जानकारियां ली। अजमेर में उपलब्ध मिट्टी की जांच मृदा कार्यालय में कराई। इसमें आवश्यक वर्मी कंपोस्ट डाला। विभिन्न स्तर पर ऑनलाइन जांच भी की ताकि कश्मीर जैसा वातावरण मिल सके। इसके बाद घर पर वातावरण तैयार करने के लिए एसी, उगाने के लिए ट्रे, पानी, मिट्टी का इंतजाम किया। इसमें करीब 2 लाख रुपए खर्च हुए। इसके बाद कश्मीर से लाए बीजों की सफाई की। बीजों पर एंटी फंगस ट्रीटमेंट का स्प्रे किया। घर के एक कमरे में लैब तैयार की। यहां तैयार किए गए बीजों को रखा। इस कमरे में 2 टन का एसी लगाया। कमरे का तापमान कश्मीर की तरह 10 से 12 डिग्री पर सेट किया। तापमान मेंटेन करने के लिए ह्मयूमिडिफाइर तैयार किया। साधारण सफेद एलडीडी लाइट के अलावा नीले और लाल प्रकाश के लिए लाइट का इस्तेमाल किया। कमरे में केसर के बीजों को ट्रे में करीब एक माह तक अंधेरे में रखा। इसके बाद इनकी देखभाल करना शुरू किया। बाद में धीरे धीरे रोशनी दी। यह काम सितंबर 2024 में शुरू किया और दिसंबर 2024 में फूल आने लगे। केसर में साल में एक बार फूल आते हैं और एक पौधे पर तीन तक फूल आए। एक फूल में तीन कलियां आईं। जो धागे की तरह थी। इस तरह तीन माह में पहली पैदावार ली और करीब 150 ग्राम केसर तैयार हुई। पहली बार में इंवेस्टमेंट फ्री हुआ गुरकीरत सिंह ने बताया- करीब एक हजार रुपए प्रति ग्राम के हिसाब से केसर बेचना शुरू किया। इसके लिए डायरेक्ट कस्टमर सर्च किए। इसके लिए ऑनलाइन मार्केटिंग की। चार जगह जिसमें सबसे ज्यादा दिल्ली एनसीआर से ऑर्डर मिले। अजमेर, जयपुर व अहमदाबाद से भी ऑर्डर मिलने लगे। आने वाले समय में अन्य जगहों से भी ऑर्डर मिलने की संभावना है। पहली फसल में करीब करीब लागत निकल गई और आज बीज पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। अब इस बीज से ही अन्य पैदावार भी ले सकूंगा। दो तरह से किया केसर का प्रोडक्शन गुरकीरत ने बताया- मैंने दो तरह से केसर का प्रोडक्शन किया। बिना मिट्टी व पानी के एयरोफोनिक टेक्नीक से केसर तैयार किया। ये काम लैब में किया। वहीं दूसरा तरीका मिट्टी में सीड मल्टीप्लिकेशन व ग्रोथ पर काम करके किया। बीज का आकार बढ़ने के बाद उसे मिट्टी में रोपा। इससे बीज की साइज बड़ी मिलेगी और नया बीज भी तैयार होगा। इसके लिए तैयारी कर दी है। सितंबर में इन बीजों से फिर केसर तैयार किया जाएगा। यह भी पढ़ें रेगिस्तान में बेर, अनार, नींबू और अंजीर की खेती:काजरी के प्रयासों से रेतीली जमीन हुई हरी-भरी; खेतों में फार्म पोंड-सोलर पंप प्रोजेक्ट लगाए पश्चिमी राजस्थान जहां 72 हजार वर्ग किलोमीटर में रेगिस्तान फैला है। इस सूखे इलाके में बारिश की कमी के कारण यहां खेती चुनौती है। किसान सिर्फ एक सीजन में खेती करते हैं। इसमें भी अगर टाइम पर अच्छी बारिश न हो तो फसल चौपट हो जाती है। (पढ़ें पूरी खबर)


