आईटीआई में शुरू कराएं डेयरी टेक्नालाजी पर प्रशिक्षण:सीएम बोले, दूध उत्पादकों को टाइम लिमिट में हो पेमेंट, सांची ब्रांड का विस्तार करें

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश की औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में डेयरी टेक्नोलॉजी पर केन्द्रित प्रशिक्षण और पाठ्यक्रम आरंभ किए जाएं। प्रदेश के दूध का प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार का भी आधार बनाया जाए। सभी जिलों में सांची ब्रांड का अधिक से अधिक विस्तार किया जाए। सांची प्रोडक्ट्स की ब्रांडिंग में गोवंश और गोपाल को शामिल किया जाए। अब तक 1241 नई दुग्ध सहकारी समितियों का गठन किया गया है मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह निर्देश मध्यप्रदेश स्टेट को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन तथा राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के मध्य हुए एग्रीमेंट के अंतर्गत बनी राज्य स्तरीय संचालन समिति की बैठक में दिए। समत्व भवन में हुई बैठक में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई, अपर मुख्य सचिव मनीष रस्तोगी, प्रमुख सचिव पशुपालन एवं डेयरी विकास उमाकांत उमराव तथा राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के पदाधिकारी उपस्थित थे। दुग्ध उत्पादकों को नियमित भुगतान समय सीमा में हो
मुख्यमंत्री ने कहा कि दुग्ध संकलन व्यवस्था की मजबूत निगरानी होना चाहिए। दूध खरीदी की कीमतें उत्पादकों के लिए लाभप्रद हों और खरीदी व्यवस्था में पारदर्शिता हो। दुग्ध उत्पादकों को उनका भुगतान नियमित रूप से समय-सीमा में हो, यह भी ध्यान रखना होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में पीपीपी मोड पर निजी भागीदारी और डेयरी सहकारी समितियों के समन्वय से दुग्ध उत्पादन गतिविधियों का विस्तार किया जाए। इससे प्रदेश में उद्यमशीलता को प्रोत्साहन देने, किसानों की आय बढ़ाने और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को गति देने में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश की औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में डेयरी टेक्नोलॉजी पर केन्द्रित प्रशिक्षण और पाठ्यक्रम आरंभ किए जाएं। इससे डेयरी प्लांट संचालन में मदद मिलेगी और युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार भी उपलब्ध होगा। 1241 नई दुग्ध समितियां गठित, 10 दिन के रोस्टर पर पेमेंट
मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक में बताया गया कि दुग्ध उत्पादकों को दूध मूल्य के नियमित एवं समय पर भुगतान के लिए 10 दिन का रोस्टर तय किया गया है। दुग्ध संघों द्वारा दूध खरीदी मूल्यों में 2 रुपए 50 पैसे से 8 रुपए 50 पैसे प्रति लीटर की वृद्धि की गई है। अब तक 1241 नई दुग्ध सहकारी समितियों का गठन किया गया है तथा 635 निष्क्रिय दुग्ध समितियों को क्रियाशील बनाया गया है। सम्पूर्ण डेयरी वेल्यू चैन का डिजिटाइजेशन करने के लिए भोपाल, ग्वालियर, उज्जैन, बुंदेलखंड तथा जबलपुर दुग्ध संघों में सॉफ्टवेयर क्रियान्वित किया गया है। दुग्ध संकलन के लिए इंदौर दुग्ध संघ से मोबाइल ऐप की व्यवस्था लागू की गई है जिससे दूध की मात्रा, गुणवत्ता और मूल्य की जानकारी तत्काल प्राप्त होती है। 35 लाख लीटर दूध विक्रय का टारगेट
बैठक में बताया कि वर्ष 2029-30 तक 26 हजार गांवों तक डेयरी सहकारी कवरेज का विस्तार करने प्रतिदिन 52 लाख कि.ग्रा. दुग्ध संकलन करने, प्रतिदिन 35 लाख लीटर दुग्ध विक्रय और 63.3 लाख लीटर प्रतिदिन प्रसंस्करण क्षमता का लक्ष्य लेकर गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। पिछले 2 वर्ष से बंद शिवपुरी डेयरी संयंत्र को प्रारंभ करने के लिए प्रक्रिया आरंभ की गई है। जबलपुर में स्थापित 10 मैट्रिक टन क्षमता के पनीर प्लांट को पुन: आरंभ करने के लिए 5 करोड़ रूपए का निवेश किया जाएगा। इंदौर में स्थापित 30 मैट्रिक टन क्षमता का दूध पाउडर संयंत्र प्रारंभ किया गया है। इसके माध्यम से 3 लाख लीटर दूध का प्रतिदिन प्रसंस्करण किया जा रहा है। ग्वालियर डेयरी संयंत्र के सुदृढ़ीकरण की प्रक्रिया भी आरंभ की गई है।

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