कलेक्टर, CEO का झूठ छिपाने आज सुबह खोदा गड्‌ढा:खंडवा में राष्ट्रपति अवॉर्ड फर्जीवाड़े पर भास्कर का खुलासा; रियलिटी चेक करने पहुंची टीम

खंडवा में जल संरक्षण के नाम पर मिले राष्ट्रपति अवॉर्ड के पीछे के फर्जीवाड़े की परतें अब खुलने लगी हैं। दैनिक भास्कर के खुलासे के बाद मंगलवार को भोपाल से सीनियर आईएएस दिनेश कुमार जैन के नेतृत्व में दो सदस्यीय जांच दल खंडवा पहुंचा। भास्कर डिजिटल में प्रकाशित खबर को आधार मानकर टीम उन सभी गांवों में पहुंची और ‘रियलिटी चेक’ किया। टीम ने यहां जाे देखा, कभी उसे देख चौंकी तो कभी मुस्कुराई। गड़बड़ियों को जांचने के लिए कहीं, गड्‌ढा खुदवाकर देखा तो कहीं ग्रामीणों से बात की। जांच में यह बात खुलकर सामने आ गई कि कलेक्टर-सीईओ का झूठ छिपाने के लिए टीम आने के पहले इंटकवेल खोदे गए। सबसे पहले जान लीजिए, क्या है यह योजना.. अब बात कर लेते हैं टीम को मिली गड़बड़ियों के बारे में… हरसूद जनपद का डोटखेड़ा गांव जांच दल कहां और किस गांव में जा रहा है। वहां क्या हुआ। यह सब जानने के लिए दैनिक भास्कर की टीम भी पीछे-पीछे चली। सबसे पहले टीम हरसूद जनपद के ग्राम डोटखेड़ा पहुंची। कागज में तालाब : यहां टीम एक किसान के खेत पर गई, जहां कागजों में तालाब निर्माण दर्शाया गया था। हकीकत : खेत में सिर्फ मिट्टी डालकर उसे तालाब का रूप दिया गया था। मौके पर कोई जल संरचना नहीं मिली। टीम ने इस फर्जीवाड़े को नोट किया और आगे बढ़ गई। पलानी माल में खुली पोल- 6 फीट की जगह 1 फीट के खोदे गड्ढे टीम यहां से सीधे ग्राम पलानी माल पहुंची। टीम के आने की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण इकट्ठा हो गए। अधिकारियों कुछ पूछते इससे पहले ही लोगों ने फर्जीवाड़े की कहानी कहना शुरू कर दिया। वे टीम को उन सभी जगहों पर लेकर पहुंचे, जहां दिखाया कुछ और गया। हकीकत कुछ और मिली। जांच टीम को क्या गड़बड़ी मिली तीन प्वाइंट्स में जानिए… जांच दल की सूचना मिली तो खोदा गड्ढा
ग्राम शाहपुरा माल में जांच दल के निरीक्षण के दौरान सामने आया कि वीरेंद्र मालवीय के खेत पर रिचार्ज पीट की राशि पूर्व में ही निकाली जा चुकी थी। वहीं, रिचार्ज पीट मौके पर नहीं था। जांच दल की सूचना मिलते ही पंचायत सचिव ने मंगलवार सुबह ही जेसीबी मशीन से एक गड्ढा खुदवा दिया, जिसकी गहराई एक फीट थी। इस्टीमेट के अनुसार इस गड्ढे का साइज 10 बाय 10 का होना था। वहीं, जिस जगह गड्ढा खोदा गया, वह खेत का एक कोना था, जहां झाड़ियां उगी थीं, इसलिए वहां उसके होने का कोई औचित्य ही नहीं था तीन तस्वीरों में देखिए टीम की जांच को… क्या है पूरा मामला?
11 नवंबर को केंद्र सरकार ने खंडवा जिले को जल संरक्षण के लिए देश में प्रथम पुरस्कार (नेशनल वाटर अवॉर्ड) और 2 करोड़ रुपए देने का ऐलान किया था। कलेक्टर ऋषभ गुप्ता और जिला पंचायत सीईओ ने राष्ट्रपति से यह सम्मान लिया। हालांकि, पड़ताल में सामने आया कि, प्रशासन ने 1.29 लाख कामों का दावा किया, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। कई तालाब और स्टॉप डैम सिर्फ कागजों में हैं। पोर्टल पर अपलोड की गई कई तस्वीरें AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से जनरेटेड थीं। शाहपुरा पंचायत में 150 डक वैल (सोख्ता गड्ढे) दिखाए गए, जबकि मौके पर सिर्फ 1-2 फीट के गड्ढे या सिर्फ पाइप मिले। हरवंशपुरा में 11 तालाबों का निर्माण दिखाया गया, जो जमीन पर मौजूद ही नहीं हैं। भास्कर के खुलासे के बाद अब भोपाल की टीम इन्हीं फर्जीवाड़ों की तस्दीक कर रही है। दैनिक भास्कर डिजिटल की वो खबरें, जिन्होंने ने खेली भ्रष्टाचार की पोल… 2-2 फीट गड्‌ढे को कुआं बताया; कलेक्टर-सीईओ का सरकारी झूठ एमपी के खंडवा जिले को सबसे ज्यादा जल संरचनाओं के निर्माण और संरक्षण के उत्कृष्ट कामों के लिए जो पहला पुरस्कार मिला है, दरअसल वो इस साल का सबसे बड़ा सरकारी झूठ है। प्रशासन ने जिन तालाबों, डक वैल और स्टॉप डैम के निर्माण का दावा किया वो हकीकत में जमीन पर मौजूद ही नहीं है… पूरी खबर पढ़ें संसद में ‘सरकारी झूठ’ की डिटेल मांग चुके 5 सांसद खंडवा के नारायण नगर की रहने वाली टीचर संध्या राजपूत को उच्च अधिकारियों की ओर से कहा गया था कि आपको अपने घर पर वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगवाना है। उनके घर से कुछ घर दूर एक मकान की छत से पाइप डली हुई थी। यह छत के पानी को नाली में पहुंचाने के लिए लगी है। उन्होंने इसे वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बताया और उसी मकान की फोटो खिंचवाकर दे दी। पूरी खबर पढ़ें…

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