युवा पाठकों ने कहा : किताबों में 50 प्रतिशत छूट मिलनी चाहिए और पुस्तक मेला नि:शुल्क लगे

जिला स्कूल मैदान में लगे राष्ट्रीय पुस्तक मेले के पांचवें दिन युवाओं की भीड़ उमड़ी। किताबों के इस मेले में 25 स्टॉल सजे हैं। पुस्तक प्रेमी सुबह से ही मेले में सजे स्टॉलों में अपनी पसंद की किताबों को लेने पहुंच रहे हैं। मंगलवार को कवयित्री सम्मेलन हुआ, जिसमें गीता सिन्हा गीतांजलि, अनीता रश्मि, रिम्मी वर्मा, रेणुबाला धार, रेणु झा रेणुका, पूनम वर्मा, कविता विकास, सुनीता अग्रवाल, बिम्मी प्रसाद, डॉ. उर्मिला सिन्हा, सुनीता श्रीवास्तव ‘जागृति, रश्मि सिन्हा, सीमा कुमार, मधुमिता शाह और डॉ. भावना अंबष्ठ ने भाग लिया और कविताओं का पाठ िकया। बुधवार को साहित्यकार और राज्यसभा सांसद महुआ माजी और अशोक प्रियदर्शी के हाथों उपन्यासकार देवेश की दो किताबों का विमोचन दिन के 2 बजे होगा। अरगोड़ा निवासी रोहित अपने दोस्तों संग पुस्तक मेले में आए। उन्होंने कहा कि यहां कांता भारती की रेत की मछली, विनोद कुमार की एक दीवार में एक खिड़की रहती, पुस्तक को दोस्तों ने अपनी पसंद से लेकर दिया। शहर से गांव तक पुस्तक मेला लगना चाहिए। वहीं, डोरंडा निवासी अमित कुमार ने कहा कि आजकल तो लोग किताबों से दूर होते जा रहे हैं। लोग बस मोबाइल और टीवी में ही लगे रहते हैं। यदि सरकारी स्तर पर सभी जगह नि:शुल्क पुस्तक मेला लगे और 50 फीसदी छूट मिले तो लोग तेजी से किताबों की दुनिया में वापसी करेंगे। मुझे प्रेमचंद, हरिवंश राय बच्चन, दिनकर की किताबें अधिक पसंद आती हैं। गोड्‌डा के हिमांशु शेखर झा ने कहा कि स्टॉल में 70 प्रकाशन की किताबें हैं। यहां जावेद अख्तर की सीपिया, प्रमोद गर्ग की क्रांति पथ का पथिक दास्तान भगत सिंह, अशोक कुमार पांडेय की कश्मीर और कश्मीरी पंडित, शम्सुर्रहमान का उपन्यास कई चांद थे सटे आसमां, कैलाश सत्यार्थी की दियासलाई, इस्मत चुगतई की लिहाफ, आशुतोष की मौन मुस्कान की मार जैसी किताबें देखने को मिलीं।

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