उपभोक्ताओं को अब बिना छत के भी मिलेगा सोलर बिजली का फायदा

प्रदेश में जिन उपभोक्ताओं के पास अपनी छत नहीं है, वे भी सोलर बिजली बना सकेंगे। प्रदेश में वर्चुअल नेट मीटरिंग और ग्रुप नेट मीटरिंग व्यवस्था पहली बार लागू कर दी गई है। राजस्थान विद्युत नियामक आयोग द्वारा संशोधित विनियम-2025 जारी होने के बाद डिस्कॉम्स ने इसके क्रियान्वयन के निर्देश भी जारी कर दिए हैं। इस फैसले से अपार्टमेंट में रहने वाले लोग, गांव-ढाणी के उपभोक्ता, सरकारी-निजी कार्यालय, स्कूल-अस्पताल और उद्योग अब किसी अन्य स्थान पर सोलर प्लांट लगाकर अपनी बिजली जरूरत पूरी कर सकेंगे। इससे न केवल बिजली बिल घटेगा, बल्कि सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा का दायरा भी बढ़ेगा। अब सोलर प्लांट सिर्फ छत पर ही नहीं, बल्कि बालकनी, खाली जमीन, सार्वजनिक भूमि और जलाशयों पर भी लगाए जा सकेंगे। क्या है वर्चुअल नेट मीटरिंग इस व्यवस्था में एक जगह लगे सोलर प्लांट से बनी बिजली को उसी डिस्कॉम क्षेत्र के कई उपभोक्ताओं के बिजली बिल में जोड़ा जा सकेगा। यानी अपार्टमेंट या कॉलोनी के लोग अलग-अलग मीटरों में सोलर बिजली का लाभ ले सकेंगे। ग्रुप नेट मीटरिंग में एक उपभोक्ता अपने किसी एक स्थान पर सोलर प्लांट लगाकर उससे बनी बिजली को अपने अन्य कनेक्शनों-घर, दुकान, ऑफिस या संस्थान में उपयोग कर सकेगा। घरेलू उपभोक्ताओं को व्हीलिंग चार्ज, बैंकिंग चार्ज और क्रॉस सब्सिडी सरचार्ज से पूरी छूट दी गई है। अन्य उपभोक्ताओं को भी कई शुल्कों में राहत मिलेगी। बैटरी स्टोरेज से जुड़ी परियोजनाओं को अतिरिक्त प्रोत्साहन दिया जाएगा। पहली बार लागू हुई वर्चुअल और ग्रुप नेट मीटरिंग व्यवस्था

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