लोहे के पिंजरे में अफसर, जमीन पर ग्रामीणों वक्ताओं को बिठाया, विरोध में हंगामा हुआ

भास्कर न्यूज | दंतेवाड़ा आर्सेलर मित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के किरंदुल स्थित बेनिफिशियेशन प्लांट के प्रस्तावित क्षमता विस्तार को लेकर मंगलवार को हुई जनसुनवाई में लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर ही सवाल खड़े हो गए। हालात ऐसे बने कि जनसुनवाई “लोक” की कम और “लोहे की जालियों के पीछे बैठे अफसरों” की ज्यादा नजर आई। कंपनी ने ग्राम किरंदुल में स्थित बेनिफिशियेशन प्लांट की क्षमता 8.0 मिलियन टन प्रतिवर्ष से बढ़ाकर 12 मिलियन टन प्रतिवर्ष करने के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति के लिए छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल में आवेदन किया था। यह परियोजना 383 हेक्टेयर क्षेत्र में प्रस्तावित है। इसी को लेकर मंगलवार सुबह 11 बजे सीनियर सेकेंडरी स्कूल, किरंदुल बस स्टैंड के पास लोक सुनवाई आयोजित की गई। एनएमडीसी किरंदुल परियोजना के ग्राउंड को पूरी तरह पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं व स्थानीय आदिवासियों ने कहा कि जब यह सुनवाई आम जनता की है, तो फिर अफसर लोहे की जालियों, पुलिस सुरक्षा और ऊंचे मंच के पीछे क्यों छिपे हैं? जनसुनवाई के दौरान परियोजना प्रभावित गांव कोडेनार, कडमपाल, मदाड़ी, चोलनार, समलवार, मडकामीरास, गुमियापाल, हिरोली, पाढ़ापुर और बड़े बचेली सहित कई गांवों की ओर से 10 प्रमुख मांगों का एक विस्तृत समझौता ज्ञापन सौंपा गया। इसमें अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभा के संवैधानिक अधिकारों को मान्यता दी जाए। रोजगार में अकुशल, अर्ध-कुशल और कुशल सभी श्रेणियों में स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता मिले। कौशल विकास और क्षमता निर्माण के कार्यक्रम ग्राम पंचायतों के साथ मिलकर चलाए जाएं। सीएसआर, सीईआर फंड का उपयोग ग्राम सभा ने प्रस्तावित और स्वीकृत पर हो। प्रभावित गांवों में मॉडल स्कूल, मौजूदा स्कूलों का उन्नयन, डिजिटल शिक्षा, लाइब्रेरी, स्वच्छता और पेयजल सुविधा दी जाए। सीएसआर के तहत प्रभावित पंचायतों के छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए प्रति वर्ष 10 से 15 लाख रुपए तक की सहायता दी जाए। एंबुलेंस सेवा, आपातकालीन स्वास्थ्य सुविधा और बेहतर चिकित्सा व्यवस्था की जाए। एक संयुक्त समन्वय समिति बनाई जाए जिसमें ग्राम पंचायत और कंपनी के प्रतिनिधि शामिल हों । साल में कम से कम चार बार समीक्षा बैठक हो। इन शर्तों के आधार पर ही क्षमता विस्तार को लेकर सहमति बनने की बात कही गई है। जनसुनवाई में दंतेवाड़ा के अलावा सुकमा जिला और जगदलपुर से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे। सुकमा जिले से आए कृष्ण सिंह चौहान ने दो टूक कहा कि कंपनी ने पहले भी कई वादे किए, लेकिन उन्हें पूरा नहीं किया। अब किसी भी हालत में शबरी नदी का पानी कंपनी को नहीं दिया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि जरूरत पड़ी तो इस मुद्दे पर न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जाएगा। लोहे की जालियों, पुलिस सुरक्षा और ऊंचे मंच के पीछे बैठे अफसरों ने इस सवाल को और गहरा कर दिया । कांग्रेस नेत्री तुलिका कर्मा जब कार्यकर्ताओं के साथ पहुंचीं तो मंच और सुरक्षा व्यवस्था देखकर भड़क उठीं। उन्होंने तीखा तंज कसते हुए कहा, यह जनसुनवाई नहीं, दरबार लग रहा है। अधिकारी राजा की तरह मंच पर बैठे हैं और ग्रामीणों को प्रजा बना दिया गया है।

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