अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद के राष्ट्रीय अधिवेशन में न्यायिक व्यवस्था सुदृढ़ करने का प्रस्ताव किया पारित

श्रीगंगानगर| अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद का तीन दिवसीय 17वां राष्ट्रीय अधिवेशन बालोतरा-नाकोड़ा स्थित विजेंद्र में हुआ। अधिवक्ता प्रताप सिंह शेखावत ने बताया कि अधिवेशन में देशभर के अधिवक्ताओं, न्यायाधीशों और विधि विशेषज्ञों ने भारतीय संविधान की प्रासंगिकता और न्यायिक सुधारों पर गहन मंथन किया। श्रीगंगानगर से इस अधिवेशन में अधिवक्ता महेन्द्रपाल गुप्ता, विशाल आहुजा, दीपक सारस्वत, सीताराम बिश्नोई, राजेश ग्रेवाल, विजेंद्र अग्रवाल, आशीष अग्रवाल व राजू लिंबा आदि सदस्यों ने अधिवेशन में भाग लिया। अधिवेशन में भाग लेकर श्रीगंगानगर लौटे अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद के दीपक सारस्वत ने बताया कि समापन सत्र के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह-सरकार्यवाह अरुण कुमार थे। उन्होंने ‘संविधान के 75 वर्ष : आत्ममंथन और राष्ट्रीय चेतना’ विषय पर विचार व्यक्त किए। अधिवेशन के अंतिम दिन राष्ट्रीय स्तर पर न्यायिक व्यवस्था को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किया गया। इस प्रस्ताव में उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की कमी, लंबित प्रकरणों तथा समयबद्ध न्यायिक नियुक्तियों की आवश्यकता पर बल दिया गया। परिषद ने चिंता जताई कि रिक्तियों के कारण आम नागरिक, विशेषकर गरीब और वंचित वर्ग प्रभावित हो रहे हैं। परिषद ने केंद्र तथा राज्य सरकारों से रिक्त पदों पर शीघ्र नियुक्ति करने की मांग की। इससे पूर्व, अधिवेशन का उद्घाटन सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश विजय बिश्नोई, राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा, भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता तथा केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने किया। इस दौरान राजस्थान उच्च न्यायालय के न्यायाधीश विनीत कुमार माथुर ने भी आयोजन स्थल का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। जहां जिला एवं सत्र न्यायाधीश एमएल सुथार ने उनका स्वागत किया। इस मौके पर निंबाराम, राजेश, जगदीश, मनोहर सिंह, सुनील जोगी, रतन पालीवाल व राजेश पंवार सहित देशभर से आए करीब 5 हजार अधिवक्ताओं ने भाग लिया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।

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