अमृतसर | भक्त हंसराज जी महाराज की असीम अनुकंपा से उनके प्रिय शिष्य तिलक राज वालिया के सान्निध्य में पट्टी स्थित प्रेम जी वैष्णो माता मंदिर में अमृतवाणी सत्संग का आयोजन किया गया। इस आध्यात्मिक समागम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने शिरकत कर गुरु महिमा का गुणगान किया और भक्ति मार्ग की बारीकियों को समझा। सत्संग के दौरान तिलक राज वालिया ने गुरु और ईश्वर के अटूट संबंध पर प्रकाश डाला। उन्होंने फरमाया कि “जहां गुरु की कृपा हो जाती है, वहां राम कृपा निश्चित है। उन्होंने भक्तों को प्रेरित करते हुए कहा कि मनुष्य को निरंतर राम नाम का सिमरन करना चाहिए। वालिया जी ने नाम दीक्षा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि जब भी अवसर मिले, किसी ‘करनी वाले संत’ से नाम दान अवश्य लेना चाहिए।


