शैक्षणिक व्यवस्था गंभीर लापरवाही का शिकार:जीएनएम और बीएससी नर्सिंग कॉलेज में पढ़ाई भगवान भरोसे, स्टाफ धूप में, छात्र ले रहे क्लास

आरबीएम अस्पताल के पास स्थित जीएनएम ट्रेनिंग सेंटर एवं बीएससी नर्सिंग कॉलेज में शैक्षणिक व्यवस्था गंभीर लापरवाही का शिकार है। करीब 3.25 करोड़ रुपए की लागत से बनी इस बिल्डिंग में पहले से चल रहा जीएनएम ट्रेनिंग सेंटर है, वहीं दिसंबर 2021 में बीएससी नर्सिंग कॉलेज शुरू किया गया था, लेकिन यहां पढ़ाई की स्थिति चिंताजनक है। यहां लापरवाही की हद इतनी है कि स्टाफ सर्दी के दिनों में बाहर धूप में बैठकर गप्पें मारकर मजे करता रहता है और सीनियर स्टूडेंट्स अंदर जूनियर बच्चों की क्लास लेते हैं। यहां अक्सर देखा गया है कि बीएससी फस्ट ईयर की क्लास थर्ड ईयर के स्टूडेंट लेते हैं। जीएनएम ट्रेनिंग सेंटर में 22 स्वीकृत पदों के मुकाबले केवल 11 स्टाफ ही कार्यरत हैं। वहीं बीएससी नर्सिंग कॉलेज की हालत और भी खराब है, जहां 24 स्वीकृत पदों में से सिर्फ 2 स्टाफ मौजूद हैं। कॉलेज में न तो प्रोफेसर हैं और न ही एसोसिएट या असिस्टेंट प्रोफेसर। ट्यूटर के 16 स्वीकृत पदों में से केवल एक ट्यूटर ड्यूटी पर है, जबकि एक ट्यूटर एक साल की ट्रेनिंग के नाम पर अवकाश पर है। इन तीन तस्वीरों में देखिए कॉलेजों के हालात… क्लास में रील बना रहे छात्र, बाहर बैठा स्टाफ अनुशासन पूरी तरह ढीला, स्टूडेंट्स क्लास रूम में बना रहे फिल्मी गानों पर रील… जहां कॉलेज में स्टाफ की भारी कमी है, वहीं प्रिंसीपल ज्यादातर अवकाश पर रहते हैं। इसी माह 12-13 दिन अवकाश पर रहे हैं। ऐसे में पीछे से वाइस प्रिंसीपल व अन्य ट्यूटर खुद बाहर धूप में बैठकर टाइम पास करते हैं और अनुशासन पूरी तरह ढीला है। बच्चे कैंपस व क्लास रूम में आपस में मस्ती करते हुए वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर फिल्मी गानों के साथ रील बनाकर अपलोड कर रहे हैं। मामले की जांच कर कार्रवाई करेंगे: डॉ. नगेंद्र सिंह “क्लास न लेकर स्टाफ बाहर धूप में बैठता है या गायब रहता है और सीनियर स्टूडेंट क्लास लेते हैं या क्लास रूम में वीडियो बनाकर रील बनाकर सोशल मीडिया पर डाल रहे हैं तो कार्रवाई करेंगे। पूर्व में भी प्रिंसीपल के हाजरी करके गायब मिलने व 4 ट्यूटरों के बिना एप्लीकेशन के सीएल लगाए जाने के मामले के संबंध में नोटिस दिया हुआ है। जीएनएम व बीएससी नर्सिंग कॉलेज में स्टाफ की कमी है, जिसके संबंध में एसजेपी मेडिकल कॉलेज के प्रिंसीपल को व्यवस्था करने के लिए लिखा जाएगा।” -डॉ. नगेंद्र सिंह भदौरिया चिकित्सा अधीक्षक, आरबीएम अस्पताल

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