छतरपुर में ठंड से बचने के लिए बंद कमरे में सिगड़ी (अंगीठी) जलाकर सोना एक वृद्ध दंपती के लिए जानलेवा साबित होते-होते बचा। कमरे में ऑक्सीजन की कमी और कार्बन मोनोऑक्साइड गैस भरने से दोनों का दम घुट गया और वे बेहोश हो गए। पड़ोसियों ने उन्हें अस्पताल पहुंचाया। हालत गंभीर होने पर उन्हें भोपाल रेफर किया गया है। घटना ओरछा रोड स्थित पेप्टेक टाउन की है। यहां रहने वाले विनोद रूसिया (72) और उनकी पत्नी शारदा रूसिया (70) मंगलवार शाम ठंड ज्यादा होने के कारण कमरे में सिगड़ी जलाकर सो गए थे। उनका बेटा राजस्व विभाग में पटवारी है। उसने माता-पिता को फोन किया, लेकिन जब काफी देर तक कॉल रिसीव नहीं हुआ, तो उसने अनहोनी की आशंका में पड़ोसियों को फोन कर घर जाने को कहा। पड़ोसियों ने जाकर देखा तो घर से धुआं निकल रहा था और दोनों बेहोश पड़े थे। ऑक्सीजन लेवल गिरा, शरीर में फैली जहरीली गैस पड़ोसियों ने तुरंत एंबुलेंस की मदद से दोनों को जिला अस्पताल पहुंचाया। डॉ. नीरज सोनी ने बताया कि बंद कमरे में आग जलने से ऑक्सीजन बर्न (खत्म) हो गई और जहरीली कार्बन मोनोऑक्साइड गैस की मात्रा बढ़ गई। इससे दंपती का दम घुटने लगा और उन्हें उल्टियां हुईं। प्राथमिक इलाज और ऑक्सीजन देने के बाद उन्हें आईसीयू में शिफ्ट किया गया था। सूत्रों के मुताबिक, जिला अस्पताल में इलाज के बाद भी दंपती की हालत नाजुक बनी हुई थी। स्थिति को देखते हुए उन्हें बेहतर इलाज के लिए हायर सेंटर भोपाल रेफर कर दिया गया है।


