अमायरा के पेरेंटस बोले- स्कूल की पूरी मान्यता रद्द हो:मां बोली– पुलिस कार्यवाही नहीं कर रही, बड़े स्कूलों के नाम के चक्कर में न रहे, मैने बेटी खो दी

नीरजा मोदी स्कूल की cbse ने मान्य रद्द कर दी है। स्कूल में छात्रा अमायरा के सुसाइड प्रकरण में सीबीएसई ने माना कि मामले में स्कूल प्रशासन की तरफ से लापरवाही हुई थी। आठवीं तक की मान्यता के लिए अब राज्य सरकार के पाले में गेंद है। अमायरा के माता पिता ने cbse के इस फैसले के बाद कहा कि वे इस फैसले से संतुष्ट है। सीबीएसई ने तो अपना काम कर दिया लेकिन अब राज्य सरकार से मांग है कि वे स्कूल पर एक्शन ले। जिन टीचर्स की लापरवाही रही उन पर एक्शन लिया जाए। हमारी बेटी को अब भी इंसाफ का इंतजार है। पढ़िए अमायरा के माता पिता से बातचीत के कुछ अंश…….. सवाल – cbse ने मान्यता रद्द की है, क्या संतुष्ट है
जवाब – सीबीएसई ने जो जांच में फाइंडआउट किया है और जो कार्यवाही करते हुए स्कूल की मान्यता रद्द की है उससे तो हम संतुष्ट है। मामले में स्कूल की लापरवाही पाई गई है, इसे सिस्टमिक फेल्योर बताया है। बच्चों की सुरक्षा को लेकर लापरवाही मानी है। किसी तरह के सुरक्षा के कोई बंदोबस्त नहीं थे। अमायरा की घटना रोकी जा सकती थी लेकिन स्कूल की खामियों की वजह से नहीं रोकी जा सकी। सीबीएसई ने तो अपना काम कर दिया, अब राज्य सरकार को करना है। उन्होंने जब माना है कि ये स्कूल 9 से 12वी तक के लिए सुरक्षित नहीं है तो वो तो पहली से लेकर आठवीं तक के बच्चों के लिए भी नहीं होगा। राज्य सरकार को अब स्कूल की मान्यता पूरी तरह रद्द करनी चाहिए। बच्चों को दूसरी स्कूल में शिफ्ट करना चाहिए। स्कूल की टीचर पूनीता शर्मा, रचना और इंदु दुबे के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज होना चाहिए। बच्ची ने कई बार कंपलेन की, नौ बार शिकायत लेकर जाने के बाद सुनवाई नहीं हुई। स्कूल ने बच्ची को सुसाइड के लिए प्रोवोक किया है। इस मामले को पूरी तरह रोका जा सकता था, क्लास टीचर अगर कोई कदम उठाती तो इस घटना को रोक सकते थे। ग्राउंड फ्लोर से बच्ची चौथी मंजिल तक पहुंच गई किसी ने नहीं देखा। सवाल- सीबीएसई ने कार्रवाई कर दी, राज्य सरकार से आप मांग कर रहे हैं, क्या राज्य सरकार की तरफ से कुछ नहीं हुआ
जवाब- हमने मदन दिलावर सर का इंटरव्यू सुना था कि इस मामले में सीबीएसई ही कार्रवाई करेगा। सीबीएसई ने तो कार्रवाई कर दी। लेकिन क्या राज्य का इसमें कुछ नहीं है। जब राज्य में स्कूल खुला है तो राज्य सरकार और शिक्षा विभाग की तो एनओसी देता है। कई राज्य सरकार की गाइड लाइन की पालना के बाद ही सीबीएसई मान्यता देता है। राज्य सरकार की जिम्मेदरी और जवाबदेही भी है। दो महीने हो गए है, इनकी जांच कमेटी गठित की थी। क्या हुआ उस कमेटी का। कमेटी ने स्कूल को नोटिस दिया था, शायद उसका जवाब तक स्कूल ने नहीं दिया है। राज्य स्तर पर तो कार्यवाही में ढिलाई ही हो रही है। मदन दिलावर और सीतराम जाट की तरफ से कोई एक्शन नहीं लिया जा रहा है। पुलिस की तरफ से कोई कार्यवाही नहीं हुई। यही कहते है कर रहे हैं, कर रहे हैं। सवाल- सीएम स्तर पर भी बात हुई थी आपकी
जवाब- हमने कोशिश की थी, दीया मैडल और किरोडीलाल जी से बात हुई थी तो उन्होंने कहा था कि सीएम से मिलवा कर आपकी परेशानी बताएंगे। दो महीने हो गई। अभी तक जो एक्शन हुआ है वह बस सीबीएसई ने किया है। कानूनी कार्यवाही का क्या। सवाल- क्या लगता है अमायरा को अब भी इंसाफ का इंतजार है
मां- मैं सीबीएसई की शुक्रगुजार हूं। उन्होंने सच में जो जांच की उसी के आधार पर कार्यवाही की। उन्होंने कमेटी बनाई और कमेटी ने जांच में पाया कि स्कूल में किस स्तर तक लापरवाही बरती जा रही है। टीचर के आईडी कार्ड नहीं है, बच्चों के आईडी कार्ड पहने हुए नहीं मिले। ऐसे में कोई हादसा हो जाए तो पहचान करना भी मुश्किल हो जाए कि बच्चा कौन था।अमायरा केस में भी यही हुआ। काफी देर तो यही नहीं पता लगा कि बच्ची कौनसी क्लास की है। सीबीएसई ने कई बाते नोट की और निष्कर्ष पर पहुंचकर स्कूल की मान्यता रदद की। कमेटी के सदस्यों का धन्यवाद करते हैं हम। सवाल- स्टेट में क्यों एक्शन नहीं लिया जा रहा, क्या प्रभावशाली होने की वजह से कार्रवाई नहीं हो रही
मां- बिल्कुल स्कूल प्रबंधन के प्रभावशाली होने की वजह से नही हो रही है। दिल्ली में शौर्य का केस हुआ है उसमें स्पेशल बना दी जो जांच कर रही है। हमारे यहां तो पुलिस कह रही है कि अगर स्कूल में रेलिंग बड़ी भी लगी होती तो बच्ची उस पर चढ़कर कूद जाती। तो क्या मेरी बच्ची कोई बंदर थी या कोई लेजर्ड थी कि बडी रेलिंग पर चढ जाती। ऐसे जवाब तो पुलिस की तरफ से मिल रहे है। पूरा मैनेज किया हुआ है मामले को। पुलिस तक मैनेज कर दी गई है। अभी तक स्कूल की टीचर्स पर क्यों एक्शन नहीं लिया गया है। पुलिस वाले कहते है कि टीचर्स पर दबाव नहीं डाल सकते तो क्यों नही डाल सकते, क्यों नहीं पूछ सकते कि आखिरी समय में क्या हुआ था। यही घटना घर पर होती तो पेरेंटस को लॉकअप में डाल देते। बच्चों से नहीं पूछ सकते लेकिन टीचर तो बालिग है न उनसे क्यों नही पूछते। सवाल- क्या घटना के बाद आपकी टीचर्स से कोई बात हुई
जवाब- मेरी तो कोई बात नहीं हुई। इनसे(अमायरा के पिता) से हुई थी तो टीचर ने कहा था कि मुझसे तो यही कहा था कि बच्चे परेशान कर रहे है। जबकि हकीकत में वह टीचर से करीब एक डेढ मिनट बात कर रही थी। टीचर से पूछो क्या बात हुई थी तो कोई जवाब नहीं मिलता। रचना मैडम तो कुछ नहीं बोलती यही कहती है मुझे नहीं पता, तो किसको पता है फिर सवाल- बुलिंग का शिकार काफी समय से हो रही थी, शिकायत की थी कई बार
मां- कई बार शिकायत की थी। दो पेरेंटस जिनके बेटे ने डिजिटल स्लेट पर लिखा और जो लडकी आखिरी कंपलेन लेकर गई उनको नाम पता है। मै उनके माता पिता से हाथ जोड़कर कहती हूं बता दो आखिर में बेटी के साथ क्या हुआ। आपकी बच्चे का कहीं नाम नही ले रहे। टीचर ने कितना बच्ची को दबाव में डाला क्या हुआ बता दो। सवाल- अब आपकी क्या मांग है राज्य सरकार से
मां- स्टेट से तो यही चाहते हैं कि पहली से आठवीं तक की भी मान्यता को रद्द किया जाए। स्कूल के बच्चो को दूसरे स्कूल में शिफ्ट किया जाए। पेरेंटस से यही निवेदन करूंगी कि बडे़ स्कूलों के नामों के चक्कर में मत आओ। बच्चे छोटे स्कूल में पढ़कर भी अच्छा नाम कमा सकते है। बड़े स्कूल के चक्कर में मैने अपनी बेटी खो दी। बच्चे को खोने का दर्द मां बाप ही जानते है। बाकी तीनों टीचर पर कानूनी एक्शन लिया जाए।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *