प्रिंसिपल के खिलाफ सड़क पर एकलव्य स्कूल के छात्र:कलेक्टर ने प्रिंसिपल को भोपाल और तीन टीचर्स को कलेक्ट्रेट भेजा

अलीराजपुर जिले के उमराली स्थित एकलव्य आदर्श स्कूल के सैकड़ों छात्र आज बुधवार सुबह प्रिंसिपल के खिलाफ आक्रोशित होकर जिला मुख्यालय से पैदल निकल पड़े। वे 14 किलोमीटर दूर कलेक्टर से मिलने जा रहे थे। रास्ते भर छात्र ‘प्रिंसिपल हाय हाय’ और ‘हमारी मांगे पूरी करो’ जैसे नारे लगा रहे थे। स्कूल के कुछ शिक्षक भी उनके साथ शामिल हैं। यह विरोध प्रदर्शन 20 दिन पहले हुए हंगामे के बाद हुआ है। तब भी छात्रों ने स्कूल परिसर में प्रिंसिपल के खिलाफ प्रदर्शन किया था। उस समय कलेक्टर नीतू माथुर खुद उमराली पहुंची थीं और छात्रों की समस्याएं सुनी थीं। उन्होंने जांच कमेटी बनाकर आगे कार्रवाई का आश्वासन दिया था। मंत्री-सांसद की शिकायत पर प्राचार्य पर कार्रवाई बच्चों के आंदोलन के बाद कैबिनेट मंत्री नागरसिंह चौहान और सांसद अनिता चौहान ने प्राचार्य और उनके तीन सहयोगियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम को पत्र दिया था। आलीराजपुर कलेक्टर ने भी मामले की जांच कर प्राचार्य और उनके सहयोगियों को हटाने के संबंध में भोपाल को पत्र लिखा था। इसके अतिरिक्त, जनजातीय कार्य विभाग आयुक्त भोपाल ने भी दिल्ली को पत्र लिखकर प्राचार्य को प्रदेश से बाहर भेजने का उल्लेख किया था। तीन शिक्षक कलेक्टर कार्यालय अटैच किया गया एकलव्य स्कूल उमराली की प्राचार्य नीलम भारती को आलीराजपुर जिले से हटाकर भोपाल अटैच कर दिया गया है। यह कार्रवाई मामले की गंभीरता और छात्रों के आंदोलन के बाद की गई है। आज सभी छात्र-छात्राएं फिर से कलेक्टर कार्यालय की ओर निकल पड़े। इसकी सूचना मिलते ही सांसद अनीता चौहान और जिला पंचायत अध्यक्ष मौके पर पहुंचे और छात्र-छात्राओं को समझाया। सांसद चौहान ने फोन पर मंत्री नागर सिंह चौहान से छात्रों की बात करवाई, जिसमें उन्हें प्राचार्य के भोपाल अटैच होने की जानकारी दी गई। हालांकि, छात्रों का कहना है कि प्रिंसिपल के साथ-साथ उन शिक्षकों को भी हटाया जाए जो उन्हें परेशान करते हैं। मामला अभी पूरी तरह शांत नहीं हुआ है। कलेक्टर नीतू माथुर भी मौके पर पहुंच रही हैं। साथ ही तीन शिक्षकों को अलीराजपुर कलेक्टर कार्यालय अटैच किया गया है। छात्रों ने कलेक्टर से भोजन व व्यवस्थाओं की शिकायत की थी निरीक्षण के दौरान, छात्र-छात्राओं ने कलेक्टर के सामने भोजन की खराब गुणवत्ता, प्राचार्य के अमानवीय व्यवहार और अन्य मूलभूत सुविधाओं की कमी की शिकायतें रखी थीं। छात्रों ने यह भी बताया था कि शिक्षा व्यवस्था संतोषजनक नहीं है और कई बार प्रशासनिक स्टाफ का व्यवहार भी अनुचित रहता है। कलेक्टर ने स्कूल में मौजूद शिक्षकों और स्टाफ से भी बात की थी। शिक्षकों ने भी प्राचार्य के व्यवहार को लेकर असंतोष व्यक्त किया था। चर्चा में यह सामने आया था कि भोजन की गुणवत्ता कमजोर है और कुछ स्टाफ सदस्य बच्चों के साथ अनुचित व्यवहार करते हैं।

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