अशोकनगर नगरपालिका क्षेत्र में विकसित हो रही अवैध कॉलोनियों के भू-खंडों की खरीद-फरोख्त पर प्रशासन ने सख्ती कर दी है। कलेक्टर आदित्य सिंह ने अवैध कॉलोनियों के भू-खंडों के आधार पर होने वाले नामांतरण पर आगामी आदेश तक रोक लगाने का अंतरिम आदेश जारी किया है। एसडीएम के प्रतिवेदन के बाद कार्रवाई
यह आदेश अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) अशोकनगर द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन के आधार पर जारी किया गया। प्रतिवेदन में बताया गया कि नगरपालिका क्षेत्र में कई स्थानों पर बिना अनुमति अवैध कॉलोनियों का विकास कर छोटे-छोटे भू-खंडों का विक्रय किया जा रहा है। अवैध कॉलोनी पाए जाने पर तत्काल रोक
प्रशासन की जांच में संबंधित भूमि अवैध कॉलोनियों के अंतर्गत पाई गई, जिसके चलते नामांतरण पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई गई है। तहसीलदार अशोकनगर को राजस्व अभिलेखों में आवश्यक प्रविष्टि दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। धारा 339 के तहत शून्य माना जाएगा अंतरण
कलेक्टर के आदेश में मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम 1961 की धारा 339 का उल्लेख किया गया है। इसके अनुसार अवैध कॉलोनी निर्माण या अवैध व्यपवर्तन के अंतर्गत किए गए किसी भी भू-खंड का अंतरण या अंतरण का करार शून्य एवं अमान्य माना जाएगा, चाहे मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता 1959 में कोई अन्य प्रावधान क्यों न हो। इन कॉलोनियों में मिली अनियमितताएं
एसडीएम के प्रतिवेदन में बताया गया कि नगर क्षेत्र के विभिन्न सर्वे क्रमांकों की भूमि पर ग्राम एवं नगर निवेश से नक्शा अनुमोदन और कॉलोनी विकास की अनुमति के बिना कॉलोनियां विकसित की जा रही हैं। इनमें लेकसिटी कॉलोनी, केशर बिहार कॉलोनी, देव होम्स और भूमि एसोसिएट शामिल हैं। नागरिकों से सतर्क रहने की अपील
कलेक्टर ने कहा कि अवैध कॉलोनी का निर्माण कर भूमि का अवैध व्यपवर्तन दंडनीय अपराध है। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी भू-खंड की खरीद से पहले उसकी वैधानिक स्थिति संबंधित विभाग से अवश्य जांच लें, अन्यथा भविष्य में कानूनी और आर्थिक परेशानी हो सकती है।


