खंडवा में जल संचयन अभियान में हुए फर्जीवाड़े की पोल खुली तो सरपंच ने ग्रामीणों को मारने उनके पीछे दौड़ लगा दी। जान से मारने की धमकी दी। दरअसल, जल संचयन अभियान को लेकर जिला प्रशासन ने फर्जी दस्तावेज के दम पर राष्ट्रपति से देश का पहला पुरस्कार और 2 करोड़ रुपए हासिल किए थे। अब इस अभियान में हुए काम की पोल खोल रही है। दैनिक भास्कर के खुलासे के बाद भोपाल से हाई लेवल जांच टीम बुधवार को पुनासा जनपद की हरवंशपुरा पंचायत पहुंची। यहां टीम को तालाबों के निर्माण में बड़ा घोटाला मिला। काम 20% भी नहीं हुआ था, लेकिन राशि 70% तक निकाल ली गई। जब ग्रामीणों ने टीम को सच्चाई बतानी चाही तो सरपंच और उसके परिवार ने ग्रामीणों को धमकाया और मारपीट की कोशिश की। सच बोलने पर ग्रामीणों को पीटने दौड़े
ग्रामीणों ने बताया कि जब जांच दल किसान राजेंद्र, चंपालाल, रामलाल, रामप्रसाद, भीम सिंह और प्रभाबाई के खेतों में तालाब देखने पहुंचा, तो सरपंच दीपक घाटे और उसके परिवार वाले भड़क गए। उन्होंने सच बताने वाले ग्रामीणों को धमकाया और मारपीट पर उतारू हो गए। ग्रामीणों का कहना है कि वे इसकी शिकायत पुलिस में करेंगे। हरवंशपुरा में खुली लूट- काम अधूरा, दाम पूरा
सीनियर आईएएस दिनेश कुमार जैन और मनरेगा परिषद के ईएनसी मिर्धा के नेतृत्व में टीम सुबह 9 बजे हरवंशपुरा पहुंची। टीम ने यहां 6 खेत में तालाबों का निरीक्षण किया। इनकी कुल लागत 5.30 लाख रुपए थी। मौके पर 20% काम भी पूरा नहीं मिला, लेकिन सरकारी खजाने से 3 लाख 75 हजार रुपए निकाल लिए गए। ग्रामीण संतोष दांगोरे ने बताया कि जांच टीम को जनपद के अधिकारी और इंजीनियर अपने हिसाब से घुमा रहे थे। गांव में 8-10 तालाब ऐसे हैं जो जमीन पर हैं ही नहीं, सिर्फ कागजों में हैं। टीम ने उन्हें देखा ही नहीं। डगवैल (कुओं) की जांच भी नहीं की गई। हालांकि, टीम ने आश्वासन दिया है कि जांच में कोई बिंदु नहीं छूटेगा। पहले दिन हरसूद में मिले थे ‘मिट्टी के तालाब’ इससे पहले मंगलवार को टीम ने हरसूद जनपद के गांवों में ‘रियलिटी चेक’ किया था, जहां हालात और भी बदतर मिले थे। क्या है पूरा मामला?
11 नवंबर को केंद्र सरकार ने खंडवा जिले को जल संरक्षण के लिए ‘नेशनल वाटर अवॉर्ड’ (प्रथम स्थान) और 2 करोड़ रुपए देने का ऐलान किया था। कलेक्टर ऋषभ गुप्ता और जिला पंचायत सीईओ नागार्जुन बी. गौड़ा ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से यह सम्मान लिया। दैनिक भास्कर ने पड़ताल की तो पता चला कि प्रशासन ने पोर्टल पर 1.29 लाख काम दिखाए थे, जिनमें से ज्यादातर फर्जी हैं। कई जगह AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से जेनरेटेड फोटो अपलोड की गईं, तो कहीं सूखे खेतों को तालाब बता दिया गया। इसी खुलासे के बाद अब भोपाल की टीम जांच कर रही है। ये भी पढ़ें… कलेक्टर, CEO का झूठ छिपाने आज सुबह खोदा गड्ढा खंडवा में जल संरक्षण के नाम पर मिले राष्ट्रपति अवॉर्ड के पीछे के फर्जीवाड़े की परतें अब खुलने लगी हैं। दैनिक भास्कर के खुलासे के बाद मंगलवार को भोपाल से सीनियर आईएएस दिनेश कुमार जैन के नेतृत्व में दो सदस्यीय जांच दल खंडवा पहुंचा। भास्कर डिजिटल में प्रकाशित खबर को आधार मानकर टीम उन सभी गांवों में पहुंची और ‘रियलिटी चेक’ किया। टीम ने यहां जाे देखा, कभी उसे देख चौंकी तो कभी मुस्कुराई। पढ़ें पूरी खबर…


