नए साल की शुरुआत झारखंड के हजारों छात्रों के लिए सिर्फ कैलेंडर बदलने का नाम नहीं है, बल्कि यह उस दौर से बाहर निकलने का संकेत है जब संसाधनों की कमी ने शिक्षा को संघर्ष बना दिया था। रांची यूनिवर्सिटी के दो सरकारी कॉलेज राम लखन सिंह यादव कॉलेज और जेएन कॉलेज, धुर्वा में वर्षों की अनदेखी के बाद अब शिक्षा विभाग ने सीधी दखल दी है। बुधवार को उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव राहुल पुरवार खुद पूरी टीम के साथ दोनों कॉलेजों के कैंपस पहुंचे। हर ब्लॉक, हर खाली जमीन और हर जरूरत का आकलन किया गया। इसी दौरान प्रधान सचिव ने राम लखन सिंह यादव कॉलेज के प्रिंसिपल द्वारा कैंपस के बेहतर रखरखाव के लिए किए जा रहे प्रयासों की खुले तौर पर सराहना की। प्रिंसिपल अपने निजी खर्च से भी कैंपस की साफ-सफाई और रखरखाव पर पैसा खर्च कर रहे हैं- जो सरकारी तंत्र में दुर्लभ उदाहरण है। इसके बाद प्रधान सचिव ने साफ कहा- अब सिर्फ निरीक्षण नहीं होगा, निर्माण होगा। 15 दिनों में प्रस्ताव चाहिए, और इसी वित्तीय चक्र में प्रक्रिया शुरू होगी। छात्रों के लिए यह नए साल का तोहफा है और व्यवस्था के लिए जवाबदेही की परीक्षा। मौके पर कुलपति प्रो. डीके सिंह, निदेशक सुधीर बाड़ा, सीसीडीसी डॉ. पीके झा, प्रिंसिपल डॉ. एस. नेहार, प्रिंसिपल विष्णु चरण महतो, रजिस्ट्रार गुरुचरण साहू समेत टेक्निकल एक्सपर्ट मौजूद थे। निरीक्षण के दौरान गेस्ट फैकल्टी ने भी अपनी समस्याएं खुलकर रखीं। उन्होंने बताया कि वे सेकेंड शिफ्ट में पढ़ाने के लिए नियुक्ति हुई थी, जो बाद में दोनों शिफ्ट मर्ज कर गया। लेकिन 14 महीने से उन्हें मानदेय का भुगतान नहीं हुआ है। इससे उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। नियुक्ति करीब 10 वर्ष पहले हुई थी और उनकी शैक्षणिक योग्यता यूजीसी मानकों के अनुरूप है। इस पर प्रधान सचिव ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सकारात्मक कार्यवाही का आश्वासन दिया। निरीक्षण करते शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव। 1. इंफ्रास्ट्रक्चर


