दुनिया के सबसे बड़े सोलर प्लांट ने छीना रोजगार:ओंकारेश्वर के मछुआरे कर रहे मजदूरी, मंत्री बोले- सोलर प्लेट के बीच जाकर पकड़ें मछली

दुनिया के सबसे बड़े सोलर पावर प्लांट ओंकारेश्वर से देश में बिजली उत्पादन का नया अध्याय लिखा जा रहा है, लेकिन इसी प्लांट की वजह से बड़ी तादाद में मछुआरे बेरोजगार हो गए हैं। मछुआरों का कहना है कि पुश्तैनी काम छोड़कर अब दिहाड़ी मजदूरी के लिए मजबूर हो चुके हैं। दैनिक भास्कर ने जब नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला से इस बारे में बात की तो उन्होंने ये मानने से ही इनकार कर दिया कि कोई बेरोजगार हुआ है। उनका कहना है कि लोग बेरोजगार हुए होते तो मेरे संज्ञान में मामला जरूर आता। कैसे एक ही झटके में सैकड़ों परिवारों का काम छिन गया और अब ये अपना जीवन यापन कैसे कर रहे हैं, पढ़िए रिपोर्ट… नेता लोग ऊपर से उड़कर चले जाते हैं
25 दिसंबर 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खजुराहो से खंडवा जिले के ओंकारेश्वर में फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट का वर्चुअल उद्घाटन किया था। नर्मदा नदी पर बने ओंकारेश्वर डैम के रिजर्वायर में सोलर प्लेट लगाई गई हैं। मछुआरों का दावा है कि इससे 350 लोग बेरोजगार हो गए हैं। सोलर पार्क से 2 किलोमीटर दूर खंडवा जिले के एखंड गांव में कड़वी बाई रहती हैं। उनके परिवार में मछली पकड़ने और बेचने का काम होता है। उन्होंने कहा- “नेता लोग ऊपर से उड़कर चले जाते हैं। नीचे वाले किस हाल में हैं, उसकी कोई खबर नहीं लेता। यहां जो बिजली पैदा करने के लिए प्लेट लगाई हैं, उससे हमारे 350 मछुआरे बेरोजगार हो गए हैं। हम क्या करें?” बोट जाल काट देती है, सोलर प्लांट वाले धमकाते हैं
मां सतमाता सैलानी फिशरीज को-ऑपरेटिव सोसायटी, एखंड के अध्यक्ष सुभान सिंह तिरोले कहते हैं- सोलर प्लांट लगाकर सरकार ने हम मछुआरों के पेट पर लात मार दी है। इसकी वजह से हम सब बेरोजगार हो गए हैं। अब हमें पेट पालने के लिए जो भी काम मिलता है, वो कर लेते हैं। काम भी ठीक से नहीं मिलता। तिरोले ने बताया कि जब सोलर प्लांट बन रहा था तो दिल्ली से कुछ लोग सर्वे के लिए आए थे। हमसे बोले, ‘अब हम आते रहेंगे। तुम सबको मुआवजा और काम दिलवाएंगे।’ सर्वे करने के बाद वो लोग चले गए। फिर कभी लौटकर नहीं आए। हम लोगों को न मुआवजा मिला, न काम। अभी मोदीजी उद्घाटन भी कर गए लेकिन हमारे पास कोई नहीं आया। जब सोलर प्लांट नहीं बना था, तब हम अच्छी कमाई कर लेते थे। दफ्तरों के चक्कर लगाकर परेशान, हाईकोर्ट में लगाई याचिका
सुभाष सिंह तिरोले ने कहा- जब भी हम अपनी बात रखने कलेक्टर के पास जाते हैं तो वे कहते हैं कि आप मत्स्य विभाग के पास जाइए। जब मत्स्य विभाग के पास जाते हैं तो वे कहते हैं कि मत्स्य महासंघ है, जो इन सब की देखरेख करता है, मत्स्य महासंघ के पास जाइए। जब मत्स्य महासंघ के पास जाते हैं, तो वे कहते हैं कि यह तो पूरा प्रशासनिक मामला है। कोई व्यक्ति हमें किसी तरह की राहत नहीं देता है। बस हमें गोल-गोल घुमाते रहते हैं। अब हम लोगों ने न्याय के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। मजदूरी करके चला रहे घर, पहले आराम से गुजारा हो जाता था
एखंड में ही रहने वाले मुकेश के घर में कुल 9 लोग है। उसका कहना है- मैं और मेरे पिता मिलकर घर चलाते हैं। अब हम बिल्कुल बेकार हो गए हैं। घर में बैठे रहते हैं। समझ नहीं आता कि घर वालों का पेट कैसे भरें। कभी किनारे पर जाल लगाते भी हैं तो उसमें कुछ नहीं मिलता। जहां एक क्विंटल मछली मिलती थी, अब एक किलो भी नहीं मिलती
मछुआरा गीता बाई बताती हैं कि पहले एक बार में एक क्विंटल तक मछली जाल में फंस जाती थी। अब तो एक किलो मछली भी नहीं फंसती है। हमारे खरीददार भी हमसे पूछते हैं कि मछली क्यों नहीं मिल रही, हम क्या बताएं। एक तो सरकार ने हमें इसके बदले कुछ दिया नहीं, ऊपर से हमसे कभी बात तक नहीं की। हम जब जाल लगाने जाते हैं तो अफसर हमें डराते हैं। कहते हैं कि इधर मत आना, वरना तुम्हारी नाव जब्त कर लेंगे। तुम लोगों को करंट लग जाएगा। हम लोगों के पास कोई जमीन नहीं है कि खेती कर लेंगे। अगर खेत मिल भी जाएंगे तो हमको खेती करना आता ही नहीं है, हमको तो बस मछली पकड़ना आता है। बेरोजगार हो गया, कैसे करूंगा दो बेटियों की शादी
दरियाब सिंह ने बताया कि नर्मदा नदी हमारी मां है। इसमें हम जाल से मछली मारते थे। हमारे दादा-परदादा यही काम करते थे। उसके बाद बांध बना, जिससे हमारा घर डूब गया। कुछ सालों में हम जैसे-तैसे संभले तो फिर प्लेट लग गई। अभी आप एक जाल फेंककर देख लो, एक भी मछली नहीं मिलेगी। अभी तो जो भी काम मिलता है, करते हैं। पेट पालना है। मेरे पांच बच्चे हैं। जब मछली का काम अच्छा था तो दो लड़कियों और एक लड़के की अच्छी शादी कर दी। रिपोर्ट में माना कि 312 मछुआरे होंगे प्रभावित
ओंकारेश्वर सोलर फ्लोटिंग पावर प्लांट से बलिया, एखंड, गोल सैलानी, घोघलगांव, गुंजरी, इन्धावाड़ी, कामनखेड़ा, करोली, केवड़ा बुजुर्ग, रीछफल, सक्तापुर और टोकी जैसे 12 गांवों के मछुआरों का रोजगार प्रभावित हुआ है। रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर लिमिटेड ने ओंकारेश्वर फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट का एनवायरमेंटल एंड सोशल इंपेक्ट एसेसमेंट कराया था। इसकी रिपोर्ट मई 2022 में आई थी। उसमें माना गया है कि इस प्रोजेक्ट से इस क्षेत्र में मछली पकड़ने वाले लगभग 312 मछुआरों के रोजगार प्रभावित होंगे। इस रिपोर्ट में वैकल्पिक रोजगार (लाइवलीहुड रेस्टोरेशन) प्लान भी दिया गया है। 312 मछुआरों की संख्या 2022 की है। मछुआरों का दावा है कि वास्तविक संख्या 350 से ज्यादा मछुआरों की है। पक्की नौकरी और आर्थिक सहायता की बात कही थी
नर्मदा बचाओ आंदोलन के वरिष्ठ कार्यकर्ता आलोक अग्रवाल कहते हैं कि इस परियोजना की जब शुरुआत हुई थी, तब जो रिपोर्ट तैयार की गई थी उसमें लिखा था कि बेरोजगार होने वालों के लिए वैकल्पिक रोजगार (लाइवलीहुड रेस्टोरेशन प्लान) की व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने कहा था कि इनको पक्की नौकरी और आर्थिक सहायता दी जाएगी। मत्स्य समितियों ने हाई कोर्ट में लगाई याचिका
इस संबंध में मत्स्य समितियों ने जबलपुर हाईकोर्ट के समक्ष एक याचिका लगाई है, जिसमें कहा है कि यह तो अविवादित तथ्य है कि इस योजना से मछुआरे प्रभावित हुए हैं। परियोजनाकर्ता ने भी यह माना है इसीलिए मांग है कि भू अर्जन का जो नया कानून है, उसके अनुसार मछुआरों को पुनर्वास के सारे अधिकार दिए जाएं। एडवोकेट श्रेयस पंडित ने कहा- हमारी मांग है कि राइट टू फेयर पॉलिसी के तहत मुआवजा दिया जाए। 2013 भूमि अधिग्रहण कानून की धारा 3 (c) में ये स्पष्ट उल्लेख है कि कोई भी समुदाय जो 3 साल या उससे अधिक समय से वाटर बॉडी या वन पर आश्रित है, वो इस कानून के अंतर्गत आएगा। न्यायालय ने सरकार को नोटिस जारी कर दिया है, वे सरकार के जवाब का इंतजार कर रहे हैं। मंत्री बोले- कोई बेरोजगार ही नहीं
नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला से दैनिक भास्कर ने इस बारे में बात की तो उन्होंने कहा- मुझे नहीं लगता कि कोई बेरोजगार हुआ है। अगर कोई ऐसा मामला होता तो हमारे संज्ञान में जरूर आता। मामले से जु़ड़ी ये खबर भी पढ़ें… एमपी में 18 लाख घरों में सूरज की बिजली, नर्मदा में तैरते प्लांट में 278 मेगावाट उत्पादन देश-दुनिया में ज्योर्तिलिंग की वजह से पहचान रखने वाला ओंकारेश्वर अब दुनिया के सबसे बड़े फ्लोटिंग पावर प्लांट (तैरने वाले) के रूप में ऊर्जा की नई कहानी लिख रहा है। चीन भारत से सिलिकॉन वेफर और अन्य उपकरण खरीदकर भारत को ही महंगे दाम में सोलर पैनल और बैटरी बेचता रहा है, लेकिन अब भारत ने चीन से ही सोलर प्लेट खरीदकर फ्लोटिंग सोलर पावर में उसी काे पछाड़ दिया है। पढ़ें पूरी खबर…

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