प्रवासी पक्षियों की शांति में खलल:सांभर पहुुंचे 2.5 लाख से ज्यादा फ्लेमिंगो, बैन के बावजूद क्षेत्र में बेखौफ उड़ रहे ड्रोन

रामसर-सूचित वेटलैंड सांभर झील में प्रवासी पक्षियों की सुरक्षा के लिए ड्रोन उड़ाने पर पूर्ण प्रतिबंध है, इसके बावजूद झील क्षेत्र में खुलेआम ड्रोन उड़ाए जा रहे हैं। यह स्थिति न केवल सरकारी आदेशों की अवहेलना है, बल्कि वन्यजीव संरक्षण कानूनों की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े करती है। झील इस समय लेसर और ग्रेटर फ्लेमिंगो समेत लाखों प्रवासी पक्षियों का प्रमुख ठिकाना बनी हुई है। वन विभाग के आदेश के अनुसार सांभर वेटलैंड और इसके इको-सेंसिटिव जोन में बिना लिखित अनुमति ड्रोन उड़ाना, एरियल फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी करना पूरी तरह प्रतिबंधित है। आदेश में स्पष्ट है कि उल्लंघन की स्थिति में ड्रोन जब्त करने और कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। अफसरों की अनदेखी पर सवाल; पक्षियों के लिए खतरे का संकेत है ड्रोन स्थानीय बर्ड वॉचर और पर्यावरण कार्यकर्ता अभिषेक वैष्णव का कहना है कि ड्रोन की आवाज और उसकी कम ऊंचाई पर उड़ान पक्षियों के लिए खतरे का संकेत होती है। फ्लेमिंगो जैसे संवेदनशील पक्षी ड्रोन को शिकारी समझ लेते हैं, जिससे वे अपने ठहराव स्थल बदलने लगते हैं। हाल के दिनों में कुछ झुंडों को झील के अपेक्षाकृत शांत और अंदरूनी हिस्सों की ओर खिसकते देखा गया है, जो मानवीय गतिविधियों के बढ़ते दबाव को दर्शाता है। ये है कानून डीसीएफ (जयपुर साउथ) कार्यालय द्वारा जारी सर्कुलर के अनुसार बिना अनुमति ड्रोन उड़ाना वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत दंडनीय अपराध है। इसमें जुर्माना, उपकरण जब्ती और कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। पानी और भोजन की उपलब्धता से बढ़ी पक्षियों की संख्या “अच्छी बारिश के बाद झील में पानी बढ़ा है और ग्रीन व ब्लू एल्गी के साथ ब्राइन श्रिम्प जैसे खाद्य तत्व भरपूर मात्रा में उपलब्ध हैं। करीब 200 वर्ग किमी में फैली झील में फ्लेमिंगो छोटे हिस्सों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरे क्षेत्र में फैले हुए हैं।”
-गोविंद यादव, बर्ड वॉचर “झील क्षेत्र में ड्रोन उड़ाना पूरी तरह प्रतिबंधित है। कुछ लोगों को ड्रोन उड़ाने से रोका गया है, हालांकि अब तक ड्रोन जब्त करने जैसी स्थिति सामने नहीं आई है। विभाग की लोकल टीमें नियमित मॉनिटरिंग कर रही हैं।”
-वी. केतन कुमार, उप वन संरक्षक

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