मध्यप्रदेश सहरिया विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष और दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री सीताराम आदिवासी का दर्द छलका है। सीताराम कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आए पूर्व मंत्री रामनिवास रावत से परेशान हैं। उन्होंने कहा- मैं वर्तमान में मंत्री हूं। इसके बावजूद न तो बैठकों में बुलाया जा रहा और न ही कोई सम्मान दिया जा रहा है। जबकि रावत को हर स्तर पर तवज्जो मिल रही है। सीताराम ने कहा कि हाल ही में जिले में हुई बैठक में उन्हें आमंत्रित तक नहीं किया गया। जब वे पिछली बैठक में गए थे, तो वहां भी उनका कोई सम्मान नहीं हुआ। मुख्यमंत्री भी रावत को ही तवज्जो देते हैं। रावत किसी पद पर नहीं, कोई राजनीतिक हैसियत नहीं
सीताराम ने तीखे शब्दों में कहा कि मैं वर्तमान में मंत्री हूं, जबकि रामनिवास रावत किसी पद पर नहीं हैं। इसके बावजूद मुख्यमंत्री, कलेक्टर और प्रभारी मंत्री सभी उन्हें प्राथमिकता दे रहे हैं। समझ नहीं आता कि मुख्यमंत्री बार-बार रामनिवास को तवज्जो क्यों दे रहे हैं, जबकि क्षेत्र में उनकी कोई राजनीतिक हैसियत नहीं है। लोकसभा चुनाव में आदिवासियों ने बीजेपी केंडिडेट को जिताया
लोकसभा चुनाव को लेकर भी सीताराम ने कहा कि रामनिवास ने नहीं, बल्कि उनकी विधानसभा क्षेत्र के आदिवासियों ने भाजपा के सांसद को जिताया है। उन्होंने दावा किया कि रावत समाज के 10-15 हजार वोटों से चुनाव नहीं जीता जा सकता, बल्कि पूरे ट्राइबल क्षेत्र के आदिवासियों ने एकजुट होकर मतदान किया था। इसके बावजूद मुख्यमंत्री बार-बार रामनिवास को श्रेय दे रहे हैं। मुझे टिकट नहीं दिया तो आदिवासी नाराज हो गए
सीताराम ने कहा कि विजयपुर, जौरा और बमोरी जैसी 10-15 विधानसभा सीटें आदिवासी वोटों से ही तय होती हैं। जब मुझे टिकट नहीं दिया गया, तो आदिवासी नाराज हो गए और भाजपा पूरी सीट हार गई। रामनिवास की वजह से क्षेत्र का माहौल खराब हो रहा
सीताराम ने आरोप लगाया कि रामनिवास रावत की वजह से पूरे क्षेत्र का माहौल खराब हो रहा है। उन्होंने कहा कि रामनिवास जनता का काम नहीं करते, सिर्फ जमीन के पीछे पड़े रहते हैं। आदिवासियों की जमीनों पर दबाव बनवाया जा रहा है। भले ही रामनिवास किसी पद पर न हों, लेकिन मुख्यमंत्री का पूरा संरक्षण उन्हें हासिल है। सहरिया विकास प्राधिकरण को नहीं दे रहे बजट
सीताराम ने यह भी आरोप लगाया कि सहरिया विकास प्राधिकरण के लिए बजट नहीं दिया जा रहा, जबकि रामनिवास से जुड़े हर प्रस्ताव पर फौरन दस्तखत हो जाते हैं। मुख्यमंत्री को किसी एक व्यक्ति के भरोसे नहीं रहना चाहिए, क्योंकि इससे पार्टी की छवि लगातार खराब हो रही है। सीएम ने मुझसे कहा कि तुमने उपचुनाव हरवाया
सीताराम आदिवासी ने कहा कि मैंने मुख्यमंत्री से अपनी पीड़ा साझा की, लेकिन उन्होंने कह दिया कि उपचुनाव मैंने हराया है। जब मुख्यमंत्री खुद दस बार क्षेत्र में गए, तो हार का ठीकरा मेरे सिर क्यों फोड़ा जा रहा है। हो सकता है रामनिवास ने ही मुख्यमंत्री को मेरे खिलाफ भड़का दिया हो। सीताराम ने कहा कि मैं पार्टी में रहकर काम करना चाहता हूं, लेकिन मंत्री होने के बावजूद जब सम्मान नहीं किया जा रहा, तो यह न सिर्फ व्यक्तिगत अपमान है, बल्कि पूरे आदिवासी समाज की उपेक्षा है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह की राजनीति से पार्टी को आने वाले समय में भारी नुकसान हो सकता है। सोलर प्लांट के नाम पर आदिवासियों की जमीन छीन रहे
सीताराम ने रघुनाथपुर और भमपुरा क्षेत्र का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि आदिवासी इलाकों में सोलर पंप और सोलर प्लांट के नाम पर आदिवासियों की जमीन छीनी जा रही है। जिन जमीनों पर सोलर प्लांट लगाने की कोशिश हो रही है, वहां आदिवासी वर्षों से खेती कर रहे हैं। आखिर आदिवासियों की जमीन पर ही क्यों परियोजनाएं थोपी जा रही हैं। क्या और कहीं जमीन नहीं है? नेता प्रतिपक्ष बोले-सीताराम ने असल स्थिति बयां की
सीताराम आदिवासी के बयान पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि सीताराम जी ने भाजपा की सरकार में आदिवासियों की उपेक्षा और प्रताड़ना की असली तस्वीर बताई है। सरकार ने मंत्री का दर्जा तो दे दिया लेकिन न तो उन्हें अधिकार दिए, न बजट दिया और न ही सम्मान दे रहे। मंत्री नागर सिंह बोले- रामनिवास दिखते या नहीं मैं क्या कहूं
मंगलवार को अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री नागर सिंह चौहान ने विभागीय उपलब्धियां गिनाने प्रेस कॉन्फ्रेंस की इस दौरान उनसे पूछा गया कि आपसे वन मंत्रालय लेकर रामनिवास रावत को वन मंत्री बनाया गया था। उसके बाद वे चुनाव हार गए। जब से आपके पास से वन मंत्रालय गया है आप कैबिनेट की बैठकों में कम ही दिखते हैं ? इस सवाल पर अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री नागर सिंह चौहान ने कहा- रामनिवास रावत के बीजेपी में शामिल होने के बाद नागर सिंह चौहान से वन मंत्रालय लेकर रावत को वन मंत्री बनाया गया था। मामले में पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने x पर पोस्ट किया है- भाजपा सरकार में राज्यमंत्री सीताराम आदिवासी जी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी पर सीधा आरोप लगा रहे हैं कि मुख्यमंत्री उनका अपमान कर रहे हैं। उनका कहना है- “मैं वर्तमान में मंत्री हूं। इसके बावजूद मुख्यमंत्री, कलेक्टर और प्रभारी मंत्री सभी रामनिवास रावत को प्राथमिकता दे रहे हैं। मुख्यमंत्री और ज़िला प्रशासन की बैठकों में मुझे बुलाया नहीं जाता।” यह सिर्फ सीताराम आदिवासी जी का अपमान नहीं है, बल्कि पूरे आदिवासी समाज के योगदान और स्वाभिमान का अपमान है। आदिवासी होने के कारण किसी मंत्री को मुख्यमंत्री और प्रशासन द्वारा बैठकों से दूर रखना जैसी घटना का मध्य प्रदेश की सरकार में होना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।


