रिम्स में मेडिकल रिप्रेजें​टेटिव की एंट्री पर लगाई गई रोक

रिम्स में मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव (एमआर) की एंट्री पर रोक लगा दी गई है। प्रबंधन ने नोटिस जारी कर यह जानकारी दी है। प्रबंधन के अनुसार, लंबे समय से शिकायत मिल रही थी कि एमआर रिम्स में दवा का अवैध खेल खेल रहे थे। वे अस्पताल के वार्ड तक पहुंचकर अपनी दवा का प्रचार कर रहे थे और मरीजों को वार्ड में ले जाकर दवा की सप्लाई भी कर रहे थे। प्रबंधन के संज्ञान में मामला आने के बाद चिकित्सा अधीक्षक ने नोटिस जारी करते हुए एमआर को रिम्स में प्रवेश नहीं करने का निर्देश दिया है। प्रबंधन द्वारा जारी किए गए नोटिस में कहा गया है कि मेडिकल सुपरिंटेंडेंट के आदेश पर एमआर अब अस्पताल परिसर में डॉक्टरों से मिलने के लिए नहीं आ सकेंगे। यह कदम अस्पताल में एमआर की अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए उठाया गया है। प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि अगर निरीक्षण के दौरान एमआर ओपीडी या वार्ड में पाए गए तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। यह कार्रवाई अव्यवस्थित गतिविधियों को रोकने के लिए की जाएगी, जिसमें एमआर को काम में बाधा डालने का आरोप लगाया जाएगा। पूर्व में केवल शनिवार को डॉक्टरों से मिलने की दी गई थी अनुमति: पूर्व में रिम्स प्रबंधन ने एमआर पर कार्रवाई करते हुए उनके प्रतिदिन रिम्स आने के समय में बदलाव किया था। एमआर के प्रवेश को लेकर निर्देश जारी किए थे, जिसमें केवल शनिवार को ओपीडी के बाद ही एमआर को डॉक्टरों से मिलने की अनुमति थी, लेकिन यह नियम प्रभावी नहीं हो सका था। एमआर हॉस्पिटल में दिनभर सक्रिय रहते थे, जिससे मरीजों को दिक्कत होती थी। देर रात तक रजिस्ट्रेशन पोर्टल शिफ्टिंग का काम चला, मरीजों को ज्यादा परेशानी नहीं रांची | रिम्स के रजिस्ट्रेशन पोर्टल में शुक्रवार को अपग्रेडेशन का काम जारी रहा। एनआईसी द्वारा पूर्व से संचालित ई-हॉस्पिटल पोर्टल को नेक्सटजेन हॉस्पिटल में शिफ्ट किया जा रहा है। रिम्स प्रबंधन ने पूर्व में ही सर्वर शिफ्टिंग की जानकारी देते हुए थोड़ी परेशानी होने की बात कही थी। दोपहर 1 बजे के बाद से हस्तांतरण की प्रक्रिया देर रात तक जारी रही। इस दौरान ओपीडी रजिस्ट्रेशन, कैश काउंटर बिलिंग और अन्य सेवाएं आंशिक रूप से प्रभावित हुईं। हस्तांतरण के कारण सामान्य दिनों की तुलना में करीब 100 कम रोगी ओपीडी में चिकित्सीय परामर्श लेने से वंचित रहे। कई लोग काउंटर में लंबे समय तक रजिस्ट्रेशन और जांच के लिए बिलिंग कराने का इंतजार करते रहे। हालांकि, प्रबंधन की ओर से रजिस्ट्रेशन व बिलिंग काउंटर के कर्मियों को वैकल्पिक व्यवस्था के तहत पूर्व में ही नया यूजर आईडी और पासवर्ड दिया गया था। इस कारण काम ज्यादा प्रभावित नहीं हुआ। रिम्स के पीआरओ डॉ. राजीव रंजन ने बताया कि पूरा डाटा पुराने से नए सॉफ्टवेयर में ट्रांसफर होने से कोई परेशानी नहीं होगी। सॉफ्टवेयर को ढंग से संचालित करने के लिए अस्पताल के कर्मियों को विशेषज्ञों ने पूरी तरह से ट्रेनिंग दी है। सभी कर्मियों को एक नंबर दिया गया है, जिसमें कॉल करके वो समाधान पा सकेंगे। मरीजों से अमृत फार्मेसी और जन औषधि से दवा खरीदने का आग्रह प्रबंधन ने मरीजों को दवाओं की खरीद के लिए कुछ विशेष निर्देश दिए हैं। मरीजों को केवल अमृत फार्मेसी और भारतीय जन औषधि केंद्र से ही दवाएं खरीदने की सलाह दी गई है, जहां सस्ती दवाएं उपलब्ध हैं। साथ ही अस्पताल ने वार्ड में दवाओं का पूरा स्टॉक रखने का निर्देश दिया है, ताकि दवाओं की कमी नहीं हो।

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