मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले में साल 2025 कई महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए चर्चा में रहा। इस साल जहां प्रशासनिक भ्रष्टाचार और आपराधिक वारदातों ने सुर्खियां बटोरीं, वहीं कुछ ऐसी प्रमुख घटनाएं भी रहीं जिन्होंने जिले की पहचान पर गहरा असर डाला। तीन दशकों से अधिक समय बाद बालाघाट जिले से नक्सलवाद का कलंक मिटाने में बालाघाट पुलिस की अहम भूमिका रही। आइए जानते हैं वो बड़ी घटनाएं, जिनके लिए बालाघाट चर्चा में रहा- 12 दिसंबर 2025: 35 साल बाद मप्र नक्सल मुक्त…इस साल 42 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण प्रदेश के नक्सल प्रभावित रहे बालाघाट में आखिरी दो नक्सली दीपक उइके व रोहित ने सीएम डॉ. मोहन यादव की वर्चुअल मौजूदगी में आत्मसमर्पण किया था। इसके बाद सीएम ने मप्र को पूर्णतः नक्सल मुक्त घोषित कर दिया था। सीएम ने बताया था कि एमएमसी (मध्यप्रदेश–महाराष्ट्र–छत्तीसगढ़) जोन में 7.75 करोड़ के इनामी 42 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया था। जिले में दिसंबर महीने में ही 22 ने हथियार डाले। जनवरी 2026 तक नक्सल मुक्त मध्यप्रदेश का लक्ष्य समय से पहले पूरा हो गया। सीएम के अनुसार, 2025 में मप्र पुलिस ने 10 नक्सलियों को मारा और 13 को आत्मसमर्पण कराया था। मध्य प्रदेश का यह प्रमुख नक्सल प्रभावित जिला, जिसकी पहचान 1990 के दशक से नक्सली हिंसा और सक्रियता के लिए रही है, अब आधिकारिक रूप से नक्सल मुक्त घोषित कर दिया गया है। यह उपलब्धि केंद्रीय गृह मंत्रालय की मार्च 2026 की तय समय सीमा से पहले हासिल हुई है। 1 नवंबर को हार्डकोर नक्सली सुनीता ओयाम के आत्मसमर्पण के बाद 6 और 11 दिसंबर को 12 अन्य नक्सलियों ने भी आत्मसमर्पण किया था। इनमें कई कुख्यात नक्सली शामिल थे। जिले के नक्सली दीपक के आत्मसमर्पण के साथ ही बालाघाट से नक्सलवाद का खात्मा हो गया। हालांकि, इस उपलब्धि की कीमत बालाघाट पुलिस को चुकानी पड़ी। हॉकफोर्स के जांबाज अधिकारी आशीष शर्मा नक्सलियों की गोली लगने से शहीद हो गए, जिन्होंने जिले से नक्सलवाद को खत्म करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया था। 20 नवंबर 2025: डोंगरगढ़-मुठभेड़ में MP का जवान शहीद, 3 गोली लगने के बावजूद टीम को लीड किया डोंगरगढ़ और बालाघाट के सीमावर्ती घने जंगलों में हुए नक्सली मुठभेड़ में मध्यप्रदेश हॉक फोर्स के निरीक्षक आशीष शर्मा शहीद हो गए थे। 19 नवंबर को कुरझेर-बोरतालाब के जंगल में मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र की संयुक्त टीम तलाशी अभियान पर निकली थे। आशीष शर्मा तीनों टीम को लीड कर रहे थे। इस दौरान उनका सामना नक्सलियों से हुआ था। नक्सलियों ने अचानक गोलीबारी शुरू कर दी थी, इस दौरान आशीष शर्मा को 3 गोली लगी थी। इस हालत में भी वे आगे बढ़कर अपनी टीम को लीड करते रहे थे और जवाबी फायरिंग की थी। हालांकि इलाज के दौरान उनकी जान चली गई थी। उनकी नेतृत्व में जवाबी कार्रवाई के बाद नक्सली अपना सामान, राशन पानी सब छोड़कर भाग गए थे। आशीष शर्मा मूल रूप से नरसिंहपुर जिले के रहने वाले थे। कुछ समय पहले हॉक फोर्स ने बालघाट जंगल में चार नक्सलियों को ढेर किया था। इसके बाद उन्हें आउट ऑफ टर्न प्रमोशन देकर निरीक्षक बनाया गया था। बताया जा रहा है आशीष शर्मा की शादी तय हो गई थी। दो महीने बाद जनवरी 2026 में शादी होनी थी। 19 नवंबर 2025: पति-पत्नी के हत्यारों को 65 दिन में नहीं पकड़ सकी पुलिस, परिवार ने लगाए लापरवाही के आरोप बालाघाट के कटंगी स्थित नांदी मोहगांव में हार्डवेयर व्यवसायी हेमेंद्र बिसेन और उनकी पत्नी योगिता बिसेन की हत्या के 65 दिन बाद भी आरोपी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। इस मामले में बिसेन परिवार ने चिंता व्यक्त की थी, उनका कहना है कि घर से लाखों रुपए के जेवरात और हजारों रुपए भी गायब थे। यह घटना चार महीने पहले हुई थी। हत्याकांड के बाद पुलिस ने जांच शुरू की थी। शुरुआत में पुलिस ने हेमेंद्र से अंतिम बार बात करने वाले परिचित और परिवार के सदस्यों की भूमिका की जांच पर ध्यान केंद्रित किया था। राजनीतिक परिवार में हुई इस हत्याकांड को पुलिस साल बीत जाने के बाद भी सुलझा नहीं सकी है। 11 नवंबर 2025: गर्लफ्रेंड का सड़क पर गला काटा, दिनदहाड़े हत्या; आरोपी बोला- 5 साल से साथ थी बालाघाट में दिनदहाड़े एक युवती की गला रेतकर हत्या कर दी गई थी। हत्या का वीडियो भी सामने आया था, जिसमें आरोपी ने युवती के गले पर चाकू से वार कर मार डाला था। ये वीडियो मौके पर मौजूद लोगों ने ही बनाया था, लेकिन युवती को बचाने की किसी की हिम्मत नहीं हो पाई थी। घटना बैहर के आमगांव में हुई थी। घटना स्थल पर मौजूद लोगों ने वीडियो बनाते हुए हत्या करने का कारण पूछने पर इस पर आरोपी ने कहा था- ‘5 साल से मेरे साथ थी। साथ में जीना-मरना सबकुछ था। अब धोखा दे रही है। अपने दोस्त-भाइयों के साथ मिलकर मारने के लिए मेरे घर लड़के भेजे थे। लड़के रास्ते में मुझे रोककर मारने के लिए तैयार थे। एक महिला के रोकने के बाद आरोपी बोला- जान बच जाएगी उसकी। पुलिस को बुलाओ और इसको लेकर जाओ। 4 अक्टूबर 2025: 2 साल से थाने के मालखाने का इंचार्ज था, ₹55 लाख चुराने का आरोपी हवलदार गिरफ्तार बालाघाट कोतवाली थाने में पदस्थ प्रधान आरक्षक और मालखाना प्रभारी राजीव पंद्रे को मालखाने से ₹55 लाख नकद और सोने-चांदी के जेवरात पार करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उसके पास से ₹40 लाख की राशि बरामद भी किया गया था। मालखाने से गायब जेवरों के संबंध में पूछताछ के दौरान आरोपी राजीव पंद्रे ने बताया कि उसने कुछ जेवर गिरवी रखे या बेच दिए थे। इस जानकारी के आधार पर पुलिस ने शाम को राजवंश ज्वेलर्स दुकान पर दबिश दी थी। यहां से 140 ग्राम सोने के जेवर बरामद किए थे। नकदी की बरामदगी के लिए पुलिस को उन अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार करना पड़ा जो प्रधान आरक्षक के साथ जुआ खेलते और जुआ खिलाते थे। हालांकि, इस मामले में अभी भी कुछ आरोपी पुलिस की गिरफ्त से बाहर ही हैं। 4 सितंबर 2025: कांग्रेस विधायक पर 3 लाख रुपए मांगने का आरोप, डीएफओ की शिकायत पर वन विभाग ने बैठाई जांच बालाघाट जिले में वन विभाग की डीएफओ (डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर) नेहा श्रीवास्तव ने कांग्रेस विधायक अनुभा मुंजारे पर रिश्वत मांगने का आरोप लगाया था। डीएफओ ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF) को पत्र लिखकर शिकायत की थी। उन्होंने कहा था कि विधायक ने उनसे 2 से 3 लाख रुपए की रिश्वत मांगी और धमकाया। शिकायती पत्र में डीएफओ ने कांग्रेस विधायक पर सरकारी काम में बाधा डालने और जबरदस्ती करने का भी आरोप लगाया था। इस मामले में वन विभाग ने जांच के आदेश दे दिए थे। विधायक ने आरोपों को खारिज करते हुए डीएफओ पर मानहानि का दावा करने की बात कही थी। विधायक अनुभा मुंजारे को डीएफओ विवाद मामले में तीन महीने की जांच के बाद क्लीन चिट मिल गई थी। इस मामले में भोपाल से लौटने के बाद सोमवार को मुंजारे ने प्रेसवार्ता कर अपनी बात रखी थी।


