मध्यप्रदेश में 534 लोगों के नए साल की शुरूआत अस्पताल से हुई। इसकी वजह सड़क हादसे और झगड़े रहे। यह आंकड़े एम्बुलेंस 108 ने 1 जनवरी को दोपहर 2 बजे जारी किए। इनके अनुसार मध्यप्रदेश में 31 दिसंबर 2025 की शाम 6 बजे से 1 जनवरी 2026 दोपहर 12 बजे तक 422 सड़क हादसे हुए और 112 लोग लड़ाई-झगड़े में घायल हुए। इन सभी को एम्बुलेंस के जरिए अस्पताल पहुंचाया गया। सड़क हादसों में सबसे आगे भोपाल
नए साल के मौके पर प्रदेश में 422 सड़क हादसे दर्ज किए गए। जबकि बीते साल यह आंकड़ा 503 रहा था। यानी, इस वर्ष सड़क हादसे कम हुए हैं। हालांकि बीते सालों की ही तरह इस साल भी सबसे ज्यादा केस प्रदेश की राजधानी भोपाल से सामने आए हैं। राजधानी में इस दौरान 23 हादसे हुए। इसमें सबसे ज्यादा केस नर्मदापुरम रोड के हैं। जिन्हें इलाज के लिए एम्बुलेंस से एम्स और हमीदिया अस्पताल पहुंचाया गया। वहीं, इंदौर में 22 और सागर में 20 सड़क हादसे हुए। लड़ाई-झगड़े में सागर आगे
प्रदेशभर से 112 लड़ाई-झगड़े के मामले आए हैं। सड़क हादसों की तरह इस मामले में भी बीते सालों की ही तरह सागर से सबसे ज्यादा 9 केस सामने आए हैं। वहीं, दूसरे नंबर पर सबसे अधिक झगड़े 6 भोपाल से और 4 इंदौर से सामने आए। इन मामलों में भी घायलों को एम्बुलेंस के जरिए अस्पताल पहुंचाया गया। देवास रहा सबसे शांत जिला
प्रदेश में अकेला देवास है, जहां से सिर्फ एक सड़क हादसे का मामला सामने आया है। जिसमें एम्बुलेंस के जरिए घायल को अस्पताल पहुंचाया गया। इसके अलावा ना झगड़े, ना हमले और ना ही किसी तरह के अन्य हादसे का केस दर्ज हुआ। घायलों में बाइक सवार ज्यादा
भोपाल के सरकारी अस्पतालों में 31 दिसंबर से लेकर 1 जनवरी को सड़क दुर्घटनाओं से संबंधित 62 मामलों में घायल होकर इलाज के लिए पहुंचे, जबकि सामान्य दिनों में 20 से 25 मामले ही आते हैं। मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. योगेंद्र श्रीवास्तव बताते हैं कि न्यू ईयर पर अधिक घटनाएं होती हैं। तेज गति से वाहन चलाने, नशे में ड्राइविंग के साथ सड़कों पर घूमते मवेशियों के कारण अधिक दुर्घटनाएं होती हैं। हेलमेट और सीट बेल्ट का नहीं करते हैं उपयोग
108 एम्बुलेंस सेवा के सीनियर मैनेजर तरुण सिंह परिहार ने कहा कि एक्सीडेंट की मामलों में पाया गया है कि लोग हेलमेट एवं सीट बेल्ट का उपयोग नहीं करते हैं। जिससे छोटी दुर्घटना भी बड़ा रूप ले लेती है, हमारा सबसे निवेदन है कि सभी नियमों का पालन करते हुए गाड़ी चलाएं एवं किसी भी निजी वाहन की जगह एम्बुलेंस का उपयोग करें, जिसमें जीवन रक्षक उपकरण और प्रशिक्षित स्टाफ मौजूद होता है जो आपकी रक्षा करने में मदद करता है।


