सेक्रेटेरिएट होगा अपडेट; सचिवालय अनुदेश के अनुपयोगी नियम बदलेंगे

रांची जिले के सरकारी कार्यालय अब कॉर्पोरेट ऑफिस की तरह दिखेंगे। इसकी शुरुआत समाहरणालय से हुई है। यहां के अफसर से कर्मचारी तक सभी के गले में फोटो आईडी व टेबल पर नेम प्लेट है। डीसी मंजूनाथ भजंत्री ने यह व्यवस्था इसलिए लागू की गई है, ताकि आम लोगों को पता चल सके कि किस काम के लिए कौन अफसर-कर्मचारी जिम्मेदार है। क्या होगा लाभ सबसे पहले तो सचिवालय कार्यालय कंप्यूटराइजेशन और ई-अॉफिस की ओर बढ़ती दुनिया के साथ अपने को मैच कर सकेगा। दूसरा सरकारी पत्रों, प्रस्तावों की ट्रैकिंग आसान हो सकेगी। ऐसा होने से कर्मियों की कार्य दक्षता में अप्रत्याशित वृद्धि होगी। इसका लाभ राज्य की जनता को मिलेगी। साथ ही दो दो नियमों के प्रभावी रहने से उत्पन्न होनेवाले विवादों पर लगाम लगेगा। क्यों पड़ी बदलाव की जरूरत ई-अॉफिस के कांसेप्ट और कंप्यूटराइजेशन के बढ़ते प्रभाव के कारण सचिवालय अनुदेश में बदलाव की सबसे अधिक जरूरत महसूस की जा रही है। सचिवालय अनुदेश में ई-मेल से किसी पत्र के आने-जाने संबंधी प्रक्रिया की चर्चा नहीं है। क्योंकि, जिस समय यह बा था, उस समय कंप्यूटराइजेशन का युग नहीं था। अब देश के किसी भी कोने से ई-मेल के जरिए पत्र आ रहे हैं। पत्र का जवाब जा रहे हैं। सचिवालयों में अब कागजी प्रक्रिया को भी समाप्त किया जा रहा है। इस क्रम में मेल और वाट्स एप के जरिए मैसेज या पत्र भेजने की प्रक्रिया को सचिवालय अनुदेश में शामिल करना आवश्यक हो गया है।कहां क्या है कठिनाई: सचिवालय अनुदेश में अब कई तरह की विसंगतियां आ गई हैं। जब यह लागू हुआ था, तब सचिवालय में रजिस्ट्रार का पद होता था। विभागीय कार्यों और दायित्वों के निर्धारण व जिम्मेदारी तय करना, उसकी मुख्य जिम्मेदारी थी। लेकिन, अब यह पद नहीं है। इस पद को उप सचिव में कन्वर्ट कर दिया गया है। इसी तरह सचिवालय अनुदेश में रूटीन क्लर्क के दायित्व रेखांकित हैं। किस तरह से वह कहीं से आनेवाले पत्र को संधारित करेगा और फिर उसे किसके पास आगे बढ़ाएगा। लेकिन, अब रूटीन क्लर्क का पद ही नहीं रहा। सचिवालय अनुदेश में कर्मियों की सेवा शर्तों का भी जिक्र है। लेकिन, अब अलग-अलग कैडर के लिए अलग-अलग सेवा शर्त नियमावलियां बना दी गई हैं, इसलिए सचिवालय अनुदेश के सेवा शर्तें यहां नियमानुकूल प्रभावी नहीं हो पा रही हैं। इसी तरह सचिवालय अनुदेश में गलत करनेवाले कर्मियों के लिए कार्रवाई का जिक्र है, लेकिन 2016 में सरकार ने अलग से झारखंड सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली बनाकर इसे प्रभावी कर दिया है। राज्य सरकार ने सचिवालय व्यवस्था को अपडेट करने की तैयारी शुरू कर दी है। कामकाज में बदलाव के लिए सचिवालय अनुदेश में संशोधन किया जाएगा। कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग ने इस पर काम शुरू कर दिया है। ई-अॉफिस की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय सचिवालय अनुदेश के तहत बदलाव किए जाएंगे। इसमें मुख्य रूप से अप्रासंगिक हो चुके नियमों को बदलने और ऑनलाइन व्यवस्था को समाहित करने की कोशिश की जा रही है। सूत्रों के अनुसार, सचिवालय अनुदेश में बदलाव का ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है। तैयार हो जाने के बाद सरकार की स्वीकृति से लागू किया जाएगा। 1952 के सचिवालय अनुदेश पर चल रहा काम: 1952 में बने सचिवालय अनुदेश ही झारखंड में भी लागू है। बिहार से अलग होने के बाद झारखंड ने उसी अनुदेश को एडॉप्ट कर लिया। जबकि, झारखंड की जरूरत और ई-अॉफिस के कंसेप्ट में हो रही वृद्धि के कारण इसके कई नियम अब अप्रासंगिक हो चुके हैं। अफसर-कर्मियों के लिए फोटो आईडी हुआ अनिवार्य

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