ओवरडोज; हर साल 2 हजार करोड़ रुपए की एंटीबायोटिक दवा खा रहा राजस्थान

भास्कर एक्सपर्ट पीएम मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में जताई चिंता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आईसीएमआर की रिपोर्ट का हवाला देते हुए एंटीबायोटिक दवाओं के गलत उपयोग पर बात की। इसके बाद पूरे देश में इन दवाओं पर चर्चा छिड़ गई है। भास्कर ने पड़ताल की तो सामने आया कि राजस्थानी हर साल करीब 2 हजार करोड़ की एंटीबायोटिक दवाएं खा रहे हैं। अकेले सरकारी अस्पतालों में ही इस साल 282 करोड़ की एंटीबायोटिक दवाएं सप्लाई हुई है। प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में कहा था- आईसीएमआर ने हाल ही में एक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें बताया कि निमोनिया और यूटीआई जैसी कई बीमारियों के खिलाफ एंटीबायोटिक दवाएं कमजोर साबित हो रही हैं। हम सभी के लिए यह चिंताजनक है। बड़ा कारण लोगों द्वारा बिना सोचे समझें एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन है। बीमारियां और संक्रमण इन दवाओं पर भारी पड़ रहे हैं। 10 साल पहले जितनी डोज कारगर नहीं {मरीजों को 10 साल पहले एंटीबायोटिक की जो डोज दी जाती थी, वह अब कारगर नहीं है। अब डोज के साथ समय भी बढ़ा। शुरुआत में माइल्ड डोज देनी चाहिए। {यूआईटी में भी काम नहीं कर रही है, क्योंकि मरीज डॉक्टर के पास आने से पहले खुद गोली लेकर देखता है। कई बैक्टीरिया पर तो एंटीबायोटिक दवाओं का असर ही खत्म हो गया है। बैक्टीरिया पर भी दवा का असर नहीं हो रहा हल्के बुखार पर एंटीबायोटिक खा लेते हैं, जबकि 3 दिन तक नहीं लेनी चाहिए। मरीज के लिए रिजर्व एंटीबायोटिक दवाएं होती हैं। मरीजों में मल्टी ड्रग रेजिस्टेंस हो जाता है। बैक्टीरिया मैकेनिज्म बनाते हैं, जिससे एंटीबायोटिक कारगर नहीं होती। अस्पताल में भर्ती बच्चों को स्ट्रॉन्ग डोज दे रहे वायरल इंफेक्शन के 60% और भर्ती 20% बच्चों को पहले से एंटीबायोटिक दवा देकर लाते हैं। नॉर्मल डोज देने से इंफेक्शन भी ठीक नहीं हो रहे। इससे स्ट्रॉन्ग डोज देनी पड़ती है। बैक्टीरियल रेजिस्टेंस भी बढ़ रहा है। करोड़ रु. की सिर्फ 113 एंटीबायोटिक दवाएं खरीदी गईं। कुल खरीद का 30% राशि इन दवाओं पर खर्च हुई। }डॉ. अशोक गुप्ता, वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ करोड़ रुपए की दवाएं और सर्जिकल आइटम प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में सप्लाई के लिए खरीदे 2025 में। }डॉ. रमन शर्मा, मेडिसिन, महात्मा गांधी हॉस्पिटल }डॉ. नचिकेत व्यास, सी. प्रो. यूरोलॉजी, एसएमएस {एमोक्सिक्लेव 625 एमजी, एजीथ्रोमाइसिन 500 एमजी और सेफीक्सिम 200 एमजी पर ही करीब 125 करोड़ खर्च हो रहे हैं। {प्राइवेट हॉस्पिटलों को भी मिलाकर बात करें तो एंटीबायोटिक की सालभर में 2000 करोड़ की खपत हो रही है। मेडिकल स्टोर्स एंटीबायोटिक दवा सिर्फ डॉक्टर की ओर से पर्ची लिखने पर ही दें। इसको लेकर जल्दी गाइडलाइन जारी करेंगे।-अजय फाटक, ड्रग कंट्रोलर सरकारी दवाओं में 30 प्रतिशत खर्च सिर्फ एंटीबायोटिक पर हो रहा

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