वन विभाग के एनओसी और सरकार के अनुशंसा के अभाव में जिले के कई योजनाएं बाधित हैं। जिसमें से हजारीबाग जिले का अति महत्वपूर्ण योजना दनुआ घाटी में चिह्नित एक्सीडेंटल जोन के एलाइनमेंट को ठीक करने का प्लान भी शामिल है। इसे ठीक करने के लिए और दुर्घटना पर विराम लगाने के लिए एनएचआई और जिला प्रशासन के साथ 16 फरवरी 2023 को बैठक हुई थी। जिसमें 11 किलोमीटर जीटी रोड को सिक्स लेन में तब्दील करने का प्लान तैयार किया गया था। आज 22 माह गुजर गए यह योजना धरातल पर नहीं उतर सका। इस योजना के लिए 238.88 करोड़ अनुमानित खर्च की राशि थी। इसमें वन विभाग के लगभग 1300 पेड़ काटे जाते। लेकिन इस बैठक में लिया गया निर्णय वन विभाग से एनओसी नहीं मिलने के कारण थम गया है। यह घाटी एक्सीडेंटल जोन के नाम से कुख्यात है। जहां हर रोज दुर्घटनाएं घटती हैं और हर साल सौ से अधिक लोगों की जान जा रही हैं सैकड़ों लोग घायल हो रहे हैं। फॉरेस्ट से एनओसी नहीं मिलने के बाद दूसरा विकल्प ढूंढा जा रहा है। इस विकल्प के तलाश में दो दिन पूर्व प्रशासनिक पदाधिकारी और एनएचआई की टीम फिर से दनुआ घाटी पहुंची। जहां घंटों मंथन के बाद एक वैकल्पिक प्लान तैयार किया है। उसमें चैनेज नंबर 254.400 पर कंट्रोल करने से दुर्घटना पर विराम लगाने की संभावना पाया। इसके लिए 400 मीटर में वन लेन, स्थल से 50 मीटर पर बैरिकेडिंग, एस आकार की बैरिकेडिंग, रबर स्ट्रिप, सूचना पट्ट और झाड़ियां की सफाई को आवश्यक पाया। तत्काल इस पर अमल करने का निर्णय लिया गया। एनएचआई के अभियंता मुकेश कुमार ने कहा कि वन विभाग से एनओसी नहीं मिलने के कारण योजना लंबित है। डीसी नैंसी सहाय ने कहा लगातार प्रयास में हैं कि सारी प्रक्रियाएं पूरी हो ताकि 6 लेन का निर्माण पूरा हो जाए। उपायुक्त नैन्सी सहाय की अध्यक्षता में दुर्घटना पर विराम लगाने के लिए 16 फरवरी 2023 को बैठक की थी। जिसमें चौपारण प्रखंड मुख्यालय से लगभग 11 किलो मीटर की लंबाई में चोरदाहा तक होने वाले सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के लिए सड़क की संरचनात्मक एवं तकनीकी खामियों को दूर करने के लिए एनएचआई के तरफ से तैयार प्रस्तावों पर विशेष चर्चा की गई थी। प्रस्तावित योजना के अनुसार दनुआ घाटी के 11 किलोमीटर मार्ग के खतरनाक मोड़ को यथासंभव सीधा करने, गति सीमा को बनाए रखने के लिए प्रस्ताव को प्रस्तुत किया गया था। प्रस्ताव में बताया गया था कि लगभग 69.75 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण प्रस्तावित है, जिसमें रैयतों का लगभग 4.2 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता होगी। अधिग्रहण होने वाले भूमि का लगभग 99 प्रतिशत भूमि वन क्षेत्र में आता है। लगभग 65 आवासों का विस्थापन होगा और एक हज़ार से अधिक वृक्ष काटने की आवश्यकता होगी। इस में अनुमानित खर्च 238.88 करोड़ थी। एनएचआई के परियोजना निदेशक ने बताया था कि इ समें सड़क सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्राक्कलन में विस्थापित आबादी का मुआवजा, सुरक्षा मानक, नागरिक सुविधा, सार्वजनिक हित, घाटी में एम्बुलेंस की विशेष व्यवस्था, स्ट्रीट लाइट, पाथ वे, फूट ओवरब्रिज, अंडरपास आदि का खास ख्याल रखा गया है।


