भास्कर न्यूज | अमृतसर शिवाला बाग भाइयां स्थित रेलवे फाटक पर लोग इन दिनों काफी परेशानियों से जूझ रहे हैं। अमृतसर रेलवे स्टेशन पर आने वाली ट्रेनें दिन में कई बार इस फाटक पर रुक जाती हैं और आधे-आधे घंटे तक उस ट्रेन को वहीं खड़ा रखा जाता है। इससे जहां वाहन चालक परेशान होते हैं, वहीं आस-पास की आबादी के लोग भी परेशान होते हैं। उन्हें एक से दूसरी तरफ जाने के लिए ट्रेन पर चढ़ कर गुजरना पड़ता है। वहीं कुछ लोग ट्रेन के नीचे से भी रेलवे लाइन पार करते हैं। ऐसा लोग इसलिए करने को मजबूर हो रहे हैं, क्योंकि यहां ट्रेनें काफी-काफी समय तक खड़ी रहती हैं। यह सिलसिला सुबह शुरू हो जाता है और देर शाम तक इसी तरह से चलता रहता है। सबसे अधिक परेशान बुजुर्ग व महिलाएं होती हैं। यह सब कुछ रेलवे की लापरवाही से हो रहा है। इस समस्या का कारण यही है कि ट्रेनें रुकने का एक सिग्नल इस रेलवे फाटक से काफी पीछे स्थित हुसैनपुरा पुल के पास था। अक्सर आने वाली ट्रेनें वहीं रोक दी जाती थीं। लोगों की शिकायतें रेलवे अधिकारियों के पास पहुंची कि जब वहां पर ट्रेनें रुकती हैं तो उनके साथ कई बार लूटपाट की घटनाएं हुई हैं। जिसके बाद रेलवे ने कार्रवाई करते हुए वहां लगे सिग्नल को ही हटवाकर आगे करवा दिया, जिसके चलते यह ट्रेनें अब शिवाला रेलवे फाटक पर ही आकर रुकने लगी हैं। बड़ी हैरानी की बात है कि रेलवे अधिकारियों ने एक समस्या का हल करते-करते अन्य लोगों को परेशानी में डाल दिया है। फिलहाल आस-पास के दुकानदार व लोगों की यही मांग है कि रेलवे की तरफ से लगाए गए सिग्नल को चेंज कर देना चाहिए, ताकि ट्रेनें यहां न रुक सकें और लोग परेशान न हो सकें। वीरवार की सुबह 10 बजे के करीब मालगाडी अमृतसर रेलवे स्टेशन पर पहुंची थी। इसे अमृतसर स्टेशन पर सिग्नल नहीं मिला तो इसे शिवाला फाटक पर रोक दिया गया। यह मालगाड़ी करीब 25 मिनट तक इसी फाटक पर खड़ी रही, जिससे लोगों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी। सबसे ज्यादा परेशानी तो शिवाला मंदिर जाने वाले लोगों को हुई। इलाके के रहने वाले अमरजीत का कहना था कि वह सुबह शिवाला मंदिर में माथा टेकने के लिए जाते हैं। बीच में रेलवे फाटक पड़ता है तो यहां कई बार ट्रेनें खड़ी हो जाती हैं। वीरवार को भी उन्हें काफी परेशान होकर जाना पड़ा। वह बुजुर्ग है और हाल ही में उनके चूल्हे का आप्रेशन भी हुआ है, ऐसे में वह न तो ट्रेन पर चढ़ कर उस तरफ जा सकते हैं और न ही नीचे से। मजबूरन उन्होंने ट्रेन हटने का ही इंतजार किया। उनका कहना था कि करीब 25 मिनट तक ट्रेन वहीं खड़ी रही। जब ट्रेन गई तो फाटक पार करके मंदिर पहुंचे और माथा टेका। उनका कहना था कि यह कोई पहली बार नहीं हुई है। ऐसा कई बार होता रहता है। सारा दिन ऐसे ही लोग यहां परेशान होते है और अपनी जान जोखिम में डालकर उन्हें एक तरफ से दूसरी तरफ जाना पड़ता है।


