वकीलों की नवीन न्यायालय परिसर के पास मिनी सचिवालय बनाने की मांग

बालोतरा | राजस्थान राज्य के स्वायत्त शासन विभाग की ओर से 17 फरवरी 1992 को राज्य गजट में सार्वजनिक परियोजना के लिए जसोल, माजीवाला व बालोतरा क्षेत्र में करीब 900 बीघा भूमि एक साथ अवाप्त किए जाने की अधिसूचना जारी की गई थी। इस भूमि का अंतिम अवार्ड मार्च 1995 में घोषित हुआ। उक्त भूमि राज्यहित के लिए सुरक्षित होने के बावजूद आज तक उसका समुचित उपयोग नहीं हुआ है। इस पर अधिवक्ताओं ने राजस्थान उच्च न्यायालय जोधपुर में रिट याचिका दायर की है। जिला अभिभाषक संघ के पूर्व अध्यक्ष उम्मेदसिंह चंपावत ने बताया कि खसरा नंबर 894 सरहद मौजा माजीवाला में 10 अप्रैल 2024 को नव न्यायालय भवनों का शिलान्यास उच्च न्यायालय जोधपुर की न्यायाधीश रेखा बोराणा की ओर से किया गया था। वर्तमान में न्यायालय भवनों का निर्माण कार्य तीसरी मंजिल तक प्रगतिरत है। इसके आसपास स्थित लगभग 900 बीघा भूमि आज भी राज्यहित की बताई जा रही है, लेकिन इसी क्षेत्र में जिला कलेक्टर कार्यालय, पुलिस अधीक्षक कार्यालय एवं अन्य जिला स्तरीय प्रशासनिक कार्यालयों की स्थापना नहीं की जा रही है। बालोतरा जिले की वर्ष 2023 में विधिवत घोषणा होने के बावजूद अब तक जिले का मिनी सचिवालय स्थापित नहीं किया जाना स्थानीय आमजन के साथ अन्याय और धोखे के समान बताया जा रहा है। आम नागरिकों, विशेषकर वादकारियों व पीड़ितों को सुलभ न्याय उपलब्ध कराने की दृष्टि से नव न्यायालय परिसर के समीप ही सभी जिला कार्यालयों की स्थापना आवश्यक मानी जा रही है। इस संबंध में जिला अभिभाषक संघ बालोतरा की ओर से निरंतर प्रयास किए गए हैं। वर्तमान में नगर परिषद बालोतरा के प्रशासक स्वयं प्रशासनिक अधिकारी होने के बावजूद जिला मुख्यालय पर सुव्यवस्थित स्थान पर मिनी सचिवालय की स्थापना नहीं हो पाना कई सवाल खड़े करता है। इसी मुद्दे को लेकर अधिवक्ता उम्मेदसिंह चंपावत, महेश खारवाल एवं गजेसिंह भाटी की ओर से राजस्थान उच्च न्यायालय जोधपुर में एक याचिका दायर की गई है। याचिका में नव न्यायालय परिसर के समीप मिनी सचिवालय के रूप में जिले के समस्त प्रशासनिक कार्यालय स्थापित नहीं किए जाने को गंभीर प्रशासनिक चूक बताया गया है।

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