वंदे भारत में चैकिंग, 2100 लोगों से 40 लाख वसूले:परिजनों को सीट तक छोड़ने गए, ऑटोमेटिक गेट बंद, तो भरना पड़ा पूरा किराया

जोधपुर मंडल रेलवे ने प्रीमियम ट्रेन वंदे भारत एक्सप्रेस में बिना टिकट और अनधिकृत यात्रा करने वालों के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा अभियान छेड़ा है। रेलवे ने स्पष्ट चेतावनी जारी की है कि वंदे भारत आम ट्रेनों से अलग है; इसमें ‘प्लेटफॉर्म टिकट’ या ‘वेटिंग टिकट’ के आधार पर एंट्री पूरी तरह प्रतिबंधित है। सख्ती का आलम यह है कि रेलवे ने अब तक ऐसे 2100 यात्रियों को पकड़ा है, जिनसे 40 लाख 39 हजार रुपए की भारी-भरकम राशि वसूल की गई है। ‘ऑटोमेटिक लॉक’ सिस्टम से फंस रहे परिजन-परिचित वंदे भारत एक्सप्रेस में कई ऐसे लोग भी फंस रहे हैं, जो अपने परिजनों या परिचितों को ‘सिर्फ सामान रखवाने’ या ‘सीट तक छोड़ने’ के लिए कोच के अंदर चले जाते हैं। चूंकि ट्रेन के दरवाजे स्वचालित (Automatic) हैं और ट्रेन चलने से कुछ समय पहले सेंट्रल कमांड से लॉक हो जाते हैं, ऐसे में छोड़ने आए लोग अंदर ही कैद हो जाते हैं। ट्रेन सीधा अगले स्टेशन पर ही रुकती है। ऐसे में टीटीई उन्हें ‘बिना टिकट यात्री’ मानते हुए कार्रवाई करते हैं। जुर्माने का गणित: सामान्य ट्रेन से कई गुना ज्यादा डीआरएम अनुराग त्रिपाठी ने बताया कि रेलवे अधिनियम 1989 के तहत यह कार्रवाई की जा रही है। वंदे भारत में पकड़े जाने पर जुर्माना सामान्य मेल/एक्सप्रेस ट्रेनों की तुलना में बहुत ज्यादा है। इस राशि में यात्रा का पूरा किराया और भारी जुर्माना (Penalty) दोनों शामिल होता है। आंकड़े: 18 लाख तो सिर्फ पेनाल्टी के वसूले डीआरएम त्रिपाठी के अनुसार रेलवे टीमों द्वारा कुल वसूली गई 40.39 लाख रुपए की राशि में से 18.57 लाख रुपए तो केवल ‘जुर्माना’ (Penalty) के हैं, जबकि शेष राशि वास्तविक किराये की है। यानी औसतन हर बिना टिकट यात्री को लगभग 2000 रुपए का फटका लगा है। स्टैंडिंग की अनुमति नहीं रेलवे प्रशासन ने यह भी साफ किया है कि वंदे भारत पूरी तरह से आरक्षित (Fully Reserved) ट्रेन है। इसमें जनरल कोच नहीं होते, इसलिए ‘जुर्माना देकर खड़े होकर यात्रा करने’ का भी कोई प्रावधान नहीं है। केवल कन्फर्म टिकट होने पर ही कोच में चढ़ें।

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