PM मोदी शनिवार को 10 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों में 65 लाख स्वामित्व संपत्ति कार्ड बांटे। पीएम मोदी वर्चुअली इस इवेंट में शामिल हुए। जबकि फील्ड पर 13 केंद्रीय मंत्री मोर्चा संभाला। कई राज्यों के मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री, संबंधित राज्यों के मंत्री और पंचायत प्रतिनिधि भी वर्चुअली शामिल हुए। जिन 12 राज्यों में यह कार्ड बांटे गए, उनमें से 230 जिलों के 50 हजार से ज्यादा गांव शामिल हैं। अब तक 1.53 लाख से ज्यादा गांवों के लिए लगभग 2.25 करोड़ संपत्ति कार्ड तैयार किए जा चुके हैं। स्वामित्व योजना अप्रैल 2020 में शुरू हुई थी। इसका पूरा नाम सर्वे ऑफ विलेजेस एंड मैपिंग विद इम्प्रोवाइज्ड टेक्नोलॉजी इन विलेजेस एरिया है। इसका उद्देश्य ग्रामीणों को संपत्तियों का मालिकाना हक दिलवाना है। 31 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश इस योजना में शामिल हो चुके हैं। इनमें से सिक्किम, तेलंगाना और तमिलनाडु ने केवल पायलट फेज में थे। पश्चिम बंगाल, बिहार, नागालैंड और मेघालय इस योजना में शामिल नहीं हुए हैं। स्वामित्व योजना त्रिपुरा, गोवा, उत्तराखंड और हरियाणा में यह योजना पूरी तरह लागू हो चुकी है। मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ और कई केंद्र शासित प्रदेशों में ड्रोन सर्वेक्षण पूरा हो चुका है। लेटेस्ट ड्रोन टेक्नोलॉजी से हो रहा सर्वे स्वामित्व योजना के तहत लेटेस्ट ड्रोन टेक्नोलॉजी से गांवों में संपत्ति मालिकों की जमीन और घर का सर्वे करके संपत्ति का रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। 11 अक्टूबर 2020 को संपत्ति कार्ड का पहला सेट वर्चुअली वितरित किया गया था। 3.17 लाख से ज्यादा गांवों में ड्रोन सर्वे पूरा हो चुका है। इसमें टारगेट का 92% हिस्सा शामिल है। यानी अब तक 1.53 लाख से ज्यादा गांवों के लिए लगभग 2.25 करोड़ संपत्ति कार्ड तैयार किए जा चुके हैं। इसमें लक्षद्वीप, लद्दाख, दिल्ली, दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव के साथ-साथ मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ के सभी गांवों की मैपिंग हो चुकी है। योजना के लक्ष्य 2026 तक पूरे होने की संभावना है। क्या है स्वामित्व योजना स्वामित्व योजना केंद्र की ओर से चलाई जाने वाली स्कीम है। पीएम मोदी ने 24 अप्रैल 2021 को 9 राज्यों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में इस योजना की शुरुआत की थी। इस योजना में ड्रोन तकनीक के जरिए जमीनों की मैपिंग और मालिकों का एक रिकॉर्ड तैयार किया जाता है। इसके बाद संपत्ति के मालिकों को एक कार्ड मुहैया कराया जाता है। इस कार्ड में उसकी जमीन से पूरी जानकारी मुहैया रहती है। सरकार इस योजना के जरिए संपत्तियों को मोनेटाइज को और आसान बनाना चाहती है ताकि अगर किसी को बैंक से लोन लेना रहे तो उसे ज्यादा भागदौड़ न करना पड़े। इसके साथ-साथ संपत्ति को लेकर उठने वाले विवादों को कम करना या खत्म करना है। 3 लाख से अधिक गांवों में सर्वे का काम पूरा योजना के अमल के लिए अब तक 3 लाख 11 हजार 282 गांवों में ड्रोन का सर्वे पूरा हो गया है। इसमें से 2 लाख 68 हजार 10 गांवों के मैप राज्य सरकार को हैंडओवर कर दिए गए हैं। इसमें से 1 लाख 79 हजार 152 गांवों के मैप को इन्क्वायरी के लिए भेज दिया गया है। 1 लाख 44 हजार 543 कार्ड भी बन चुके हैं। इसमें 1 लाख 13 हजार 806 कार्डों का वितरण भी कर दिया गया है।


