भागीरथपुरा में दूषित पानी से बीमार लोगों की संख्या अभी भी 200 के पार है। गुरुवार को स्वास्थ्य विभाग की 21 टीमों ने क्षेत्र में व्यापक सर्वे किया, जिसमें 1714 घरों के 8571 लोगों की जांच की गई। इस दौरान 338 नए मरीज सामने आए, जिन्हें मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। सीएमएचओ डॉ. माधव प्रसाद हासानी ने बताया कि अब तक कुल 272 मरीजों को विभिन्न अस्पतालों में भर्ती किया जा चुका है। इनमें से 71 मरीज स्वस्थ होने पर डिस्चार्ज कर दिए गए हैं, जबकि फिलहाल में 201 मरीज अस्पतालों में भर्ती हैं। 32 की हालत गंभीर होने पर उन्हें आईसीयू में रखा है। उधर, गुरुवार को रेसीडेंसी कोठी में हाईलेवल बैठक हुई। नगरीय प्रशासन व आवास विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे ने जिस लीकेज की बात सामने आ रही है, उससे पूरे इलाके में इतने बड़े स्तर पर पानी का दूषित होना संभव नहीं लगता। जल वितरण लाइनों की दोबारा जांच जरूरी है। साथ ही आसपास की इंडस्ट्री, बोरिंग और अन्य संभावित स्रोतों की भी जांच के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा, लीकेज अकेला कारण नहीं, पूरे सिस्टम की जांच जरूरी है। सुरक्षा के लिए बैरिकेडिंग की भागीरथपुरा में जल संक्रमण से लोगों की मौत के मुद्दे पर शुक्रवार को युवा कांग्रेस नगर निगम मुख्यालय का घेराव करेगी। उधर, सुरक्षा के लिए गुरुवार रात निगम मुख्यालय के बाहर बैरिकेडिंग कर दी गई। महापौर की फिर वही पीड़ा- अफसर सुनते ही नहीं महापौर पुष्यमित्र भार्गव की पीड़ा एक बार फिर सामने आई। बोले- जनहित के मुद्दों पर संवाद ही नहीं होता, फैसले फाइलों में अटक जाते हैं। अफसर सुनते ही नहीं। भागीरथपुरा में चार महीने पहले टेंडर हो चुके थे, लेकिन काम नहीं होने दिया गया। इस पर एसीएस दुबे ने साफ कहा कि पुराने रेट पर ही टेंडर कर काम शुरू किया जाए। एमआईसी सदस्य अभिषेक शर्मा ने कहा कि ड्रेनेज लाइन डालने पर इंजीनियर को निलंबित कर दिया गया, जबकि काम तत्कालीन निगमायुक्त के निर्देश पर हुआ था। ऐसे फैसलों से फील्ड में काम करने का भरोसा टूटता है। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भी माना कि सिस्टम में तालमेल की कमी है। मंत्री तुलसी सिलावट, सांसद शंकर लालवानी, विधायक महेंद्र हार्डिया व मधु वर्मा, कलेक्टर शिवम वर्मा, निगमायुक्त दिलीप कुमार यादव मौजूद रहे। टंकी से सप्लाय शुरू, पर पानी पीने की मनाही, नए सिरे से सैंपल ले रहे गुरुवार सुबह अपर मुख्य सचिव संजय दुबे प्रभावित क्षेत्र में पहुंचे। उन्होंने नलों से पानी भरकर सूंघा, कुछ जगह हाथ से पानी की गुणवत्ता परखी और रहवासियों से सवाल किए कि पानी साफ आ रहा है या नहीं। लोगों को समझाइश दी कि फिलहाल इस पानी का उपयोग पीने के लिए न करें। पानी को उबालकर और छानकर ही इस्तेमाल करें। रहवासियों ने शिकायत की कि कई दिनों से लाइनों में गंदा पानी आ रहा था। कई बार निगम अफसरों को सूचना दी गई, लेकिन समय पर कार्रवाई नहीं हुई। शिकायतों पर पहले ध्यान दिया जाता तो हालात यहां तक नहीं पहुंचते। दुबे ने आशंका जताई कि नाले का पानी किसी लाइन में तो नहीं जा रहा। उधर, चार दिन बाद जब टंकी से दोबारा पानी सप्लाय शुरू की तो लोगों को आगाह किया कि इस पानी को न पिएं। पानी की सप्लाय के बाद नए सिरे से सैंपल लिए गए। चार दिन में 80 सैंपल पहले ही ले चुके हैं। कांग्रेस ने गुरुवार को नगर निगम मुख्यालय, विभिन्न जोन और भागीरथपुरा क्षेत्र में विरोध में पोस्टर लगाए। अव्यान के पिता ने नहीं ली आर्थिक मदद :
पीड़ितों को मदद के लिए मंत्री कैलाश विजयवर्गीय पहुंचे। इस दौरान सात लोगों से छह माह के अव्यान के माता-पिता ने आर्थिक मदद लेने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा बेटा चला गया, मदद लेकर क्या करेंगे।


