परिवहन विभाग में पदस्थ एक बाबू की करतूत ने 13 आरक्षकों के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं। फर्जी प्रश्नपत्र बनाकर विभागीय परीक्षा कराने के मामले में परिवहन मुख्यालय की स्थापना शाखा में तैनात बाबू मोहन आदिवासी को मुख्य आरोपी माना जा रहा है। इस मामले में अब 13 आरक्षक भी जांच के दायरे में आ गए हैं। विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, बाबू मोहन आदिवासी ने 13 आरक्षकों के साथ मिलकर जानबूझकर फर्जी प्रश्नपत्र तैयार किया और उसे पुलिस प्रशिक्षण केंद्र (पीटीएस) तिघरा भेज दिया। आरोप है कि इसका मकसद यह था कि प्रशिक्षण के बाद होने वाली परीक्षा में सभी आरक्षक आसानी से पास हो जाएं और दोबारा परीक्षा न देनी पड़े। यह भी आरोप सामने आए हैं कि बाबू ने आरक्षकों को पास कराने के बदले ‘ठेका’ लिया था और उसी के तहत पूरी योजना बनाई गई। मामले की विभागीय जांच डिप्टी ट्रांसपोर्ट कमिश्नर किरण शर्मा के नेतृत्व में चल रही है। अनुकंपा नियुक्ति वाले आरक्षक भी जांच के घेरे में
बताया जा रहा है कि ये 13 आरक्षक अनुकंपा नियुक्ति के तहत भर्ती हुए थे और वर्षों से उनका विभागीय प्रशिक्षण नहीं हुआ था। 10 से 12 साल बाद उन्हें तीन महीने का प्रशिक्षण पीटीएस तिघरा में दिया गया। प्रशिक्षण के बाद नवंबर में परीक्षा हुई, जिसमें सभी आरक्षकों के पास होने की जानकारी सामने आई। हालांकि मामला उजागर होने के बाद विभाग ने सफाई दी कि फर्जी प्रश्नपत्र पर परीक्षा तो ली गई थी, लेकिन उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन नहीं कराया गया। अब नियमों के अनुसार दोबारा परीक्षा कराई जा रही है, जो दो से तीन दिन में होगी। ऐसे खुला मामला
परीक्षा के बाद सभी 13 आरक्षक जॉइनिंग के लिए परिवहन मुख्यालय पहुंचे। जब ज्वाइंट ट्रांसपोर्ट कमिश्नर विनोद भार्गव ने परीक्षा प्रक्रिया को लेकर सवाल किया, तो मामला संदिग्ध लगा। जांच में सामने आया कि पीटीएस तिघरा को प्रश्नपत्र सीधे बाबू ने भेजा था, जबकि नियम के मुताबिक यह प्रक्रिया ज्वाइंट ट्रांसपोर्ट कमिश्नर के माध्यम से होनी चाहिए थी। नियम तोड़कर खुद बनाया पेपर नियमों के अनुसार पीटीएस तिघरा में होने वाली परीक्षाओं के लिए समिति गठित की जाती है और विशेषज्ञों से प्रश्नपत्र तैयार कराया जाता है। लेकिन बाबू मोहन आदिवासी ने पूरी प्रक्रिया को नजरअंदाज करते हुए खुद ही प्रश्नपत्र तैयार कर भेज दिया। परिवहन आयुक्त विवेक शर्मा ने बताया कि आरोपी कर्मचारी को निलंबित कर दिया गया है और विभागीय जांच समिति गठित की गई है। दोषी पाए जाने पर उसे नौकरी से बर्खास्त कर एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। मामले की जांच पुलिस करेगी।


