इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से 14 मौतों के बाद भोपाल में भी पानी को लेकी हलचल शुरू हुई है। नगर निगम ने बुधवार और गुरुवार को कई इलाकों से सैंपल लिए। लेकिन, सिर्फ सैंपल लेने भर से न तस्वीर साफ होगी न पानी। राजधानी में भी तमाम ऐसे इलाके हैं, जहां रोजाना लोग दूषित पानी पी रहे हैं। बारिश के समय इस तरह की दिक्कतें अधिक बढ़ जाती हैं। दैनिक भास्कर ने गुरुवार को शहर के अलग-अलग 6 इलाकों में जाकर स्थिति देखी तो पता चला कि यहां भी हालत खराब है। पड़ताल में पता चला कि भोपाल में करीब 20 लाख आबादी को नगर निगम पानी की सप्लाई करता है। यह बड़ा तालाब, नर्मदा लाइन और केरवा डेम से होती है। लेकिन, जिन ओवरहेड और संपवेल टैंकों के जरिए यह पानी लोगों के घरों तक पहुंचता है, उनमें से करीब 80% टैंकों की 6 महीने से लेकर एक साल तक सफाई नहीं हुई है। यानी गंदगी से भरे टैंकों का पानी सीधे लोगों के घरों तक पहुंच रहा है। लापरवाही यहीं नहीं रुकती। कई इलाकों में पीने के पानी की पाइप लाइनें नाले-नालियों के भीतर से बिछाई गई हैं। ऐसे में नालों का पानी रिसकर पाइप लाइनों में मिलने की आशंका है। भोपाल में सिस्टम अब भी आंखें मूंदे बैठा है। ऐसे में सवाल है कि क्या जिम्मेदार इंदौर जैसी घटना का इंतजार कर रहे हैं? हर तरफ सिस्टम का लीकेज… जिम्मेदार आंख मूंदकर निकल जाते हैं पन्ना नगर… सीवेज और पीने के
पानी की लाइन एक ही नाली में
यह हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में आता है। यहां पर पीने की पाइप लाइन को नाली के भीतर डाल दिया गया है। इसे बिछाने के बाद ऊपर से फर्शी रख दी गई है। इसी पाइप लाइन के जरिये नल कनेक्शन लोगों के घरों में जाते हैं। शाहजहांनाबाद स्थित लाल टंकी… एक साल पहले हुई थी सफाई
इस टंकी की सफाई 3 जनवरी 2025 को की गई थी। इसके बाद 2 जुलाई 2025 को सफाई की गई। अगली सफाई कब होगी, दर्ज नहीं है। अब यहां पेंट कर नई तारीख दर्ज कराने की तैयारी की जा रही है। टीला जमालपुरा, 13 फरवरी 2025 के बाद से नहीं हुई टंकी की सफाई
यहां बीडीए कॉलोनी के पास बनी पानी की टंकी की आखिरी बार सफाई 13 फरवरी 2025 को हुई थी। इसके बाद 12 अगस्त 2025 को सफाई होनी थी। कयहां पर सफाई नहीं हो पाई है, इसलिए नई तारीख दर्ज नहीं की गई है। विवेकानंद नगर, डेडलाइन निकली फिर भी महीनों से नहीं हुई सफाई
विवेकानंद नगर पानी की टंकी की सफाई 21 अप्रैल 2025 को हुई थी। इसके बाद 21 अक्टूबर को सफाई होनी थी, जो हुई ही नहीं है। यहां भी इसके आगे की तारीख नहीं लिखी है। ऐसी होशियारी… टंकी साफ कराए बिना पेंटरों से डलवा रहे नई तारीख
पुरानी जेल के पास वेटरनरी परिसर में सालों से सफाई नहीं हुई है। यही स्थिति यहां पर बने ओवरहेड टैंक की भी है। यहां के ओवरहेड टैंक गेट पर लिखा है कि टंकी की सफाई 5 दिसंबर 2013 को हुई थी। इसके बाद 6 जून 2024 को दोबारा सफाई की गई। लेकिन, इसके बाद यहां पर सफाई नहीं हुई। यानी एक साल से ज्यादा समय बीतने के बाद भी टैंक साफ नहीं किया गया है। आनन-फानन में शाम के वक्त एक पेंटर को भेजकर यहां के बाहरी गेट पर नई तारीख लिखने की तैयारी चल रही थी। पेंटर का दावा है कि शहर की सभी टंकियों पर नई तारीख लिखने के लिए अफसरों ने कहा है। क्या है नियम… नियम के तहत हर छह महीने में ओवरहेड टैंक की सफाई होनी चाहिए। अगली सफाई कब होनी है, यह तारीख भी टंकी में दर्ज की जानी चाहिए। रवींद्र भवन के पास नाले के अंदर पानी की लाइन
तस्वीर रवींद्र भवन के पास की है। यहां नगर निगम के अफसरों ने नाले के भीतर पीने के पानी की पाइप लाइनें बिछा रखी हैं। यहां लाइन में लीकेज भी है। पाइप लाइन से 24 घंटे नाले का गंदा पानी गिरता रहता है। पाइप लाइन के आसपास की स्थिति देखकर समझ में आता है कि सालों से नाले की सफाई नहीं हुई है। गंदगी का अंबार लगा है। यहां पर पीने के पानी में गंदा पानी मिलने की आशंका सबसे अधिक है। निगम का दावा: साफ पानी कर रहे सप्लाई
नगर निगम ने दावा किया कि गुरुवार को 20 कर्मचारियों के दल ने शहर में 119 स्थानों पर पानी की टेस्टिंग की। इसमें गंध, रंग, स्वाद, क्लोरीन की मात्रा, पीएच (अम्ल या क्षार) और टर्बिडिटी (पानी का मैलापन) की जांच हुई। निगम का दावा है कि शहर में सभी जगहों पर पानी साफ पाया गया। कांग्रेस नेता ने करोंद में किया प्रदर्शन
कांग्रेस नेता मनोज शुक्ला ने करोंद हाउसिंग बोर्ड इलाके में प्रदर्शन किया। उन्होंने पूरे इलाके में सीवेज और पानी की लाइन साथ में बिछाए जाने के लिए नगर निगम को जिम्मेदार ठहराया। कहा कि हर घर में लोगों को पेट संबंधी बीमारियां हो रही हैं, क्योंकि वे गंदा पानी पीने को मजबूर हैं। टीमें जांच कर रही हैं, सैंपल में सभी पास हैं
हमारी टीमें रोजाना पानी के सैंपल ले रही हैं। कोई परेशानी सामने नहीं आई है। टंकियों की सफाई कराई जा रही है। जहां से भी शिकायत मिलती है। उनका समाधान किया जाता है। नाले में पीने के पानी की पाइप लाइन पुरानी है। उनके भी लिए जा रहे हैं। -संस्कृति जैन, कमिश्नर नगर निगम भोपाल


