रतलाम और खंडवा मेडिकल कॉलेज में बिना जरूरी दस्तावेजों के ही करीब 100 पदों पर डॉक्टर और प्रोफेसरों की नियुक्ति का मामला सामने आया है। छह साल पहले तत्कालीन एमजीएम डीन डॉ. संजय दीक्षित (रतलाम) और वर्तमान में खंडवा मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. संजय कुमार दादू (खंडवा) को नियुक्तियों के नोडल अफसर बनाया गया था। इन्होंने शासकीय प्रक्रिया की गोपनीयता भंग करते हुए दोनों कॉलेजों के लिए एक ही स्थान पर आवेदन पत्र मंगवाए। शासकीय दस्तावेजों में हेरफेर कर आवेदकों के दस्तावेजों की अदला-बदली भी की। इस फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ, जब शिवपुरी के डॉ. मुकेश मित्तल ने आरटीआई के जरिए दस्तावेजों की जानकारी मांगी। कुछ दस्तावेज दिए गए, लेकिन बाकी के बारे में कॉलेज प्रबंधन ने दो साल तक एक- दूसरे को पत्र लिखकर मामले को टालने की कोशिश की। आखिरकार, जब पुलिस कार्रवाई का दबाव बढ़ा, तो प्रबंधन ने स्वीकार किया कि दस्तावेज गायब हो गए हैं। खंडवा पुलिस को एफआईआर दर्ज करने के लिए आवेदन दे दिया गया है। पूर्व डीन एमजीएम (तत्कालीन नोडल ऑफिसर) डॉ. संजय दीक्षित ने बताया कि दोनों कॉलेजों में भर्ती प्रक्रिया एकसाथ की थी, लेकिन खंडवा की सीटें भर नहीं पा रही थीं। तो रतलाम मेडिकल कॉलेज के लिए आवेदन करने वालों को खंडवा के लिए बुला लिया था। उस समय दस्तावेज कुछ गुम हो गए थे तो किसी कर्मचारी को हटाया भी था। खंडवा मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. एसके दादू ने बताया कि उस समय दोनों मेडिकल कॉलेजों में भर्ती एक साथ की गई थी। डॉक्यूमेंट गायब होने को लेकर एफआईआर का आवेदन मेरे समय में नहीं दिया गया। लेकिन मैं अब उसको दिखवा लेता हूं कि शासकीय दस्तावेज को लेकर सालभर में पुलिस ने उसमें क्या किया।


