भास्कर न्यूज | चिल्फी घाटी छत्तीसगढ़ व मध्यप्रदेश को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण अंतरराज्यीय सड़क चिल्फी घाटी आज जिला प्रशासन व राज्य सरकार की घोर उदासीनता का प्रतीक बन चुकी है। वर्षों से प्रस्तावित चिल्फी बस स्टैंड आज तक कागजों से बाहर नहीं निकल पाया, जिसका खामियाजा रोजाना सैकड़ों यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है। बस स्टैंड के अभाव में यात्री सड़क किनारे खड़े होकर बसों का इंतजार करने को मजबूर हैं। न प्रतीक्षालय है, न शौचालय, न पेयजल और न ही छाया की व्यवस्था। हालात इतने बदतर हैं कि महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे खुले में शौच और पेशाब करने को मजबूर हैं। यह स्थिति न केवल अमानवीय है बल्कि स्वच्छ भारत मिशन की खुली अवहेलना भी है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि बस स्टैंड के लिए पहले से प्रस्तावित भूमि पर अतिक्रमण लगातार बढ़ता जा रहा है, लेकिन जिला प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है। यदि समय रहते अतिक्रमण नहीं हटाया गया तो भविष्य में बस स्टैंड निर्माण असंभव हो जाएगा। हाईवे पर बसों को खड़ा करना पड़ रहा, खतरा बस स्टैंड न होने के कारण यात्री बसें सीधे हाईवे पर खड़ी की जा रही हैं। तेज रफ्तार अंतरराज्यीय वाहनों के बीच सवारी चढ़ाना-उतारना किसी बड़े हादसे को दावत देने जैसा है। स्थानीय नागरिकों का कहना हैं कि चिल्फी घाटी केवल यातायात मार्ग नहीं, बल्कि पर्यटन, व्यापार व आदिवासी अंचलों की जीवनरेखा है। इसके बावजूद प्रशासनिक प्राथमिकता सूची में यह क्षेत्र कहीं नजर नहीं आता। क्षेत्रवासियों ने मांग की है कि प्रस्तावित बस स्टैंड भूमि से अतिक्रमण हटाया जाए।


