विदिशा जिले में कुपोषण उन्मूलन के लिए ‘पोषण संजीवनी अभियान’ चलाया जा रहा है। कलेक्टर अंशुल गुप्ता के निर्देश पर महिला एवं बाल विकास विभाग यह अभियान संचालित कर रहा है। पिछले पांच महीनों में इस पहल के तहत 800 से अधिक बच्चे गंभीर कुपोषण की श्रेणी से बाहर आ चुके हैं। अभियान का मुख्य उद्देश्य अति गंभीर कुपोषित बच्चों को स्वस्थ जीवन प्रदान करना है। वर्तमान में जिले में लगभग 1449 बच्चे अति कुपोषित चिन्हित किए गए हैं। इन बच्चों को विशेष पोषण आहार, नियमित स्वास्थ्य जांच और पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। सुपोषण किट से बेहतर परिणाम जिला कार्यक्रम अधिकारी विनीता लोढ़ा ने बताया कि परियोजना स्तर पर कुपोषित बच्चों की सूची बनाकर उन्हें ‘सुपोषण किट’ वितरित की जा रही है। बीते पांच महीनों में करीब 1200 गंभीर कुपोषित बच्चों को यह किट दी गई, जिससे लगभग 800 बच्चे गंभीर कुपोषण की श्रेणी से बाहर निकलने में सफल रहे हैं। सुपोषण किट में सूखा राशन पैकेट, मूंगदाल, मुरमुरा, बेसन, गुड़, पोहा, चावल, आटा, घी, मसाले, पौष्टिक लड्डू बनाने की सामग्री के साथ खिलौने और शिक्षण सामग्री शामिल है। एनआरसी में भर्ती बच्चों का उपचार करने के साथ-साथ उनके परिजनों को संतुलित आहार, साफ-सफाई और बच्चों की सही देखभाल के बारे में प्रशिक्षित किया जा रहा है। सामूहिक प्रयास से बढ़ रहा असर अभियान में जनप्रतिनिधि, अधिकारी, समाजसेवी और जागरूक नागरिक ‘पोषण मित्र’ बनकर कुपोषित बच्चों और गर्भवती महिलाओं को गोद ले रहे हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग का मानना है कि सामूहिक प्रयासों से विदिशा जिले को कुपोषण मुक्त बनाने की दिशा में यह अभियान महत्वपूर्ण साबित हो रहा है।


