सरगुजा संभाग के पांच जिलों में 15 नवंबर से 31 दिसंबर की स्थिति में मात्र 40 फीसदी धान की खरीदी हो सकी है। वहीं समितियों से धान का उठाव नहीं होने से समितियों में जगह नहीं है। इसके कारण धान की खरीदी प्रभावित हो सकती है। किसानों को इस वर्ष नए प्रावधानों के तहत पंजीयन, टोकन की समस्या से जूझना पड़ रहा है। समितियों में धान जाम होने से किसानों की समस्या बढ़ सकती है। सरगुजा संभाग के पांच जिलों में धान की खरीदी सहकारी बैंक सरगुजा के अधीन की जाती है। इस वर्ष पांच जिलों में धान खरीदी का लक्ष्य 1 करोड़ 37 लाख 43 हजार 40 क्विंटल रखा गया है। 31 दिसंबर तक 48 लाख 38 हजार 69.80 क्विंटल धान की खरीदी हुई है। जिला सहकारी बैंक के चीफ मार्केटिंग सुपरवाइजर बीकेपी सिंह ने बताया कि अब तक लक्ष्य का 40 प्रतिशत धान ही खरीदा जा सका है। उठाव नहीं होने से समितियों में जगह नहीं, नुकसान की आशंका
चीफ मार्केटिंग सुपरवाइजर बीकेपी सिंह ने बताया कि सहकारी समितियों से अब तक मात्र 8.95 प्रतिशत धान का उठाव हो सका है। पिछले वर्ष दिसंबर तक खरीदे गए धान का 37 प्रतिशत उठाव हो चुका था। धान का उठाव नहीं होने से दोहरे नुकसान की आशंका है। सरगुजा में आगामी दिनों में मौसम खराब होने का पूर्वानुमान है। इससे धान भीगने की आशंका है। वहीं समितियों में धान भंडारण के लिए जगह नहीं है। इसके कारण उठाव नहीं हुआ तो खरीदी भी बंद हो सकती है। अव्यवस्था से बढ़ी किसानों की परेशानी
इस वर्ष नए प्रावधानों के तहत धान के रकबे का पंजीयन नहीं होने से किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ा। निजी कंपनियों द्वारा कराए गए डिजिटल क्रॉप सर्वे में सही जानकारी दर्ज नहीं होने के कारण किसानों का रकबा घट गया है। वहीं इस वर्ष धान खरीदी के लिए ऑनलाइन टोकन की व्यवस्था की गई है। प्रतिदिन की लिमिट का 70 प्रतिशत टोकन ऑनलाइन एप से एवं 30 प्रतिशत का टोकन समितियों से ऑफलाइन काटा जा रहा है। ऑनलाइन टोकन बिचौलियों द्वारा कटवा लिया जाता है। इस कारण टोकन के लिए मारामारी की स्थिति है। समितियों में धान रखने के लिए जगह नहीं बची है एवं शेष 60 फीसदी धान की खरीदी एक माह में करनी है। इससे किसानों के साथ सहकारी समितियों की भी मुश्किलें बढ़ गई हैं। सहकारी बैंक के चीफ मार्केटिंग सुपरवाइजर सिंह ने बताया कि सरगुजा जिले के दरिमा, सूरजपुर जिले के बतरा आदि समितियों में धान रखने के लिए जगह नहीं है। ऐसी स्थिति में धान की खरीदी प्रभावित होने की आशंका है। इससे किसानों को परेशान होना पड़ेेगा।


