अनूपपुर में 4 लाख क्विंटल धान खुले में रखी:वाहन कम होने से उठाव धीमा, मौसम बदलने से बारिश की आशंका

अनूपपुर जिले में नए वर्ष के दूसरे दिन मौसम का मिजाज अचानक बदल गया है। शुक्रवार सुबह से ही आसमान में हल्के बादल छाए रहे, जिससे धूप की तपिश कम रही। राजस्थान में हुई मावठा वर्षा के बाद अब यहां भी बारिश की प्रबल आशंका जताई जा रही है। मौसम में आया यह बदलाव प्रशासन और किसानों के लिए बड़ी चिंता का सबब बन गया है, क्योंकि लाखों क्विंटल धान अभी भी खुले आसमान के नीचे पड़ा है। परिवहन में लापरवाही और वाहनों की कमी जिले के 34 धान उपार्जन केंद्रों पर धान का उठाव समय पर न होना एक गंभीर समस्या बन चुका है। विभागीय अनदेखी और वाहन ठेकेदार के पास संसाधनों की कमी के कारण उपार्जन केंद्रों पर धान का अंबार लगा है। वर्तमान में लगभग 4,33,436.78 क्विंटल धान खुले मैदानों में असुरक्षित पड़ा है, जिस पर बारिश की एक बूंद भी भारी पड़ सकती है। खरीदी और परिवहन के आंकड़े विभागीय आंकड़ों पर नजर डालें तो 1 दिसंबर से अब तक जिले के 15,735 किसानों से कुल 8,18,366.75 क्विंटल धान की खरीदी की जा चुकी है। हालांकि, परिवहन की धीमी रफ्तार का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब तक केवल 3,92,152.36 क्विंटल धान ही गोदामों तक पहुंच पाया है। परिवहन की इस सुस्ती ने खरीदी केंद्रों को पूरी तरह जाम कर दिया है। मजदूरों की कमी और प्रबंधकों की चिंता पिछले दो दिनों से धान के परिवहन का कार्य पूरी तरह ठप रहा। बताया जा रहा है कि नववर्ष के अवकाश के कारण मजदूर केंद्रों पर नहीं पहुंचे, जिससे लोडिंग का काम नहीं हो सका। केंद्र प्रबंधकों का कहना है कि यदि अचानक बारिश होती है, तो इतनी बड़ी मात्रा में धान की बोरियों को ढकना या सुरक्षित करना उनके बस से बाहर होगा। इससे धान के भीगने और खराब होने का बड़ा खतरा बना हुआ है। प्रशासन की वैकल्पिक व्यवस्था और नई रणनीति बिगड़ते मौसम और परिवहन की चुनौतियों को देखते हुए खाद्य और नागरिक आपूर्ति अधिकारी अनिता सोरते ने बताया कि स्थिति को सुधारने के लिए 30 दिसंबर से दूसरे वाहन ठेकेदार को काम पर लगाया गया है। शुक्रवार से सभी उपार्जन केंद्रों पर वाहनों की संख्या बढ़ा दी गई है। प्रशासन ने उन केंद्रों पर 3 से 4 वाहन लगाए हैं जहां स्टॉक के लिए गोदाम उपलब्ध नहीं हैं, ताकि असुरक्षित रखे धान को प्राथमिकता के आधार पर गोदामों तक पहुंचाया जा सके।

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