ठगी का मामला:रैकेट ऑपरेट करने को रायपुर आए, आधार कार्ड से फर्जी कंपनी खोलीं

दिल्ली और रायपुर में पकड़े गए ठग पवन व गगन से पूछताछ के दौरान कई खुलासे हुए हैं। रायपुर से ठगी का रैकेट ऑपरेट करने के लिए ही दोनों इस साल जून में रायपुर आए। रायपुर रेंज आईजी अमरेश मिश्रा ने बताया कि साजिश के तहत दोनों ने कोटा में 25 हजार रुपए में एक ऑफिस किराया पर लिया। इनकी कुछ माह पहले दिल्ली में ही राजीव सिंघानियां से मुलाकात हुई। उसने ही इन्हें शॉर्ट कट पैसा कमाने का तरीका बताया और ऑनलाइन ठगों से जुड़वाया। उसके कहने पर दोनों रायपुर आए। और अपने आधार कार्ड में रायपुर का पता अपडेट कराया। फिर दो फर्जी कंपनी फ्रिट्ज टेकसॉल और जीपी इंटरप्राइजेस का रजिस्ट्रेशन कराकर एक ही दफ्तर में शुरू कीं। दोनों कंपनियों के नाम से अलग-अलग बैंक में 30 प्लेटिनम खाते खुलवाए। इन्हीं में ठगी का पैसा आने लगा। 6 माह में इन खातों में 175 करोड रुपए का ट्रांजेक्शन हुआ। आने वाले पैसों को अमेरिकी डॉलर में कनवर्ट किया गया। कुछ पैसे क्रिप्टोकरंसी में बदले गए। फिर हांगकांग की 4 कंपनी हाइपर लिंक इंफो सिस्टम लिमिटेड, ब्लू ऑर्किड ग्लोबल, कंसाई इंटरनेशनल लि. एमएस मॉर्निंग और थाईलैंड की एनआरआई सिस्टम टेक्नो, परसौल प्रोसेस एंड टेक्नोलॉजी, ग्लोबल विजार्ड टेक्नोलॉजी, डाटा आर्ट टेक्नोलॉजी कंपनी में पैसा भेजा गया। डिजिटल अरेस्ट व ट्रेडिंग का झांसा दिल्ली निवासी राजीव सिंघानियां की तलाश की जा रही है। उसके बाद ही गैंग के सरगना तक पहुंचने में मदद मिलेगी। दोनों 10वीं-12वीं तक पढ़े हैं, लेकिन खुद को सॉफ्टवेयर इंजीनियर बताते थे। कोटा के दो युवकों को ऑफिस बॉय के तौर पर रखा। पवन और गगन एक कमरे में बैठकर सिर्फ कंप्यूटर पर काम करते थे। वे जिस गैंग के लिए काम करते थे, उसका सरगना उन्हें 50-50 हजार रुपए वेतन देता था। कमीशन अलग से मिलता था। ऑफिस से विदेश में पैसा भेजने लगे। पुलिस का दावा है कि राजीव थाईलैंड, हांगकांग, लाओस, कंबोडिया में बैठे संगठित साइबर अपराधी गिरोह से जुड़ा हुआ है। ये गैंग विदेश से डिजिटल अरेस्ट और शेयर ट्रेडिंग का झांसा देकर ठगी कर रही हैं। गिरोह में भारत के लोग भी शामिल हैं, जिन्हें साइबर गुलाम बनाकर रखा गया है। 41 से ज्यादा बैंक खाते, 10 राज्यों में केस दर्ज
आरोपियों ठिकानों से 41 से ज्यादा बैंक खातों का ब्योरा मिला है। इनमें 30 उनकी फर्जी कंपनियों के नाम पर खाते हैं। कुछ खुद और रिश्तेदारों के नाम पर हैं। उनके दफ्तर से डेबिट कार्ड, चेकबुक, कंप्यूटर, लैपटॉप, डॉलर परचेस इनवॉइस, वन टाइम पासकोड डिवाइस, यूपीआई स्कैनर अलग-अलग एड्रेस के आधार कार्ड जब्त किया। आरोपियों के खिलाफ महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, राजस्थान समेत 10 राज्यों में केस दर्ज हैं।

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