शहर में ट्रैफिक दबाव कम करने के लिए सबसे जरूरी है पब्लिक ट्रांसपोर्ट—बस, मेट्रो, फीडर सर्विस—को बढ़ाकर एक कोने से दूसरे कोने तक ट्रांसपोर्ट कनेक्टिविटी बढ़ाना। राज्य सरकार ने हाल में प्रहलादपुरा से टोडी मोड़ तक मेट्रो चलाने के लिए डीपीआर तैयार की है। यह काम 5 साल में पूरा होने की उम्मीद है। जेडीए के एक सर्वे में राजधानी में 30 साल में करीब 150 किमी मेट्रो रूट की जरूरत बताई गई है, जबकि वर्तमान में ही राजधानी को 150 किमी मेट्रो नेटवर्क की जरूरत है। इसमें राजधानी के 9 रूट अहम हैं। मुंबई की तर्ज पर करना होगा काम


