दूषित पानी से 16 लोगों की मौत ने पूरे देश को हिला दिया है। 200 से ज्यादा लोग अस्पतालों में भर्ती हैं। 26 आईसीयू में हैं। वहां सप्लाई हुए पानी में हैजा सहित कई घातक बीमारियों के जीवाणु पाए गए हैं। भास्कर ने इस विषय पर नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ये सीधे सवाल किया कि 8 साल से देश के सबसे स्वच्छ शहर में गंदे पानी से मौत के लिए किसे जिम्मेदार मानते हैं। उन्होंने माना कि दूषित जल से लोगों की मौत हुई है, इसलिए हमारा सिस्टम भी जिम्मेदारी से बच नहीं सकता। मुख्यमंत्री के निर्देश पर जांच कमेटी बनाई गई थी, उसमें जो लोग प्रारंभिक तौर पर जिम्मेदार पाए गए हैं, उन पर कार्रवाई भी की गई है। आइंदा ऐसी स्थिति न बने, इसके लिए पूरे प्रदेश में नई हेल्प लाइन बनाएंगे। समय रहते शिकायत पर कार्रवाई होती तो ऐसी स्थिति नहीं बनती, अब पानी की हर छोटी शिकायत का प्राथमिकता से निराकरण होगा लोग लंबे समय से शिकायत कर रहे थे, क्या कोई सुनने वाला ही नहीं है?
मामले में गड़बड़ी हुई है। समय रहते शिकायत पर कार्रवाई होती तो ऐसी स्थिति नहीं बनती। जिन लोगों ने शिकायत की अनदेखी की है उन पर मुख्यमंत्री के निर्देश पर कार्रवाई की गई है। अब पूरा सिस्टम बना रहे हैं, ताकि आइंदा प्रदेश में कहीं भी ऐसी स्थिति न बने। मौतों को रोका नहीं जा सकता था?
मैं दिल्ली में था, जब मेरे पास सूचना आई तत्काल इंदौर पहुंचा। भागीरथपुरा की हालत दयनीय थी। कमजोर आर्थिक स्थिति के चलते लोग इलाज कराने अस्पताल तक नहीं जा रहे थे। सीएम से बात करने की कोशिश की, संपर्क नहीं हो पाया तो अफसरों से बात कर, सभी अस्पतालों में नि:शुल्क इलाज का इंतजाम किया। सुबह 9 बजे से रात को 9 बजे तक वहीं रहकर एक–एक घर पहुंच कर लोगों को सभी तरह की जरूरी मदद पहुंचाई। तीन रात ठीक से सोए तक नहीं। अन्यथा मौत का आंकड़ा और बढ़ने की आशंका थी। प्रशासन ने कोर्ट के सामने सिर्फ चार मौत स्वीकार की है?
अभी तक जो रिपोर्ट आई है, उसके आधार पर उन्होंने कोर्ट को अवगत कराया होगा। कुछ लोगों की मेडिकल रिपोर्ट बाकी है। कुछ लोगों को अन्य समस्या भी हो सकती है, यह पूरी रिपोर्ट आने के बाद ही कहा जा सकता है। मृतकों को मात्र दो–दो लाख रुपए मुआवजा दिया गया है?
अभी हमारी प्राथमिकता उन्हें तत्काल मदद पहुंचाने की थी। बीमारों के समुचित नि:शुल्क उपचार और उनके परिजन की देखभाल के साथ उन्हें शुद्ध पानी मुहैया कराना था। मुआवजा राशि बढ़ाने के साथ बीमारों को आर्थिक मदद देने पर भी विचार चल रहा है। जल्द ही उस पर निर्णय हो जाएगा। अपका विधानसभा क्षेत्र है, वहां काम पेंडिंग कैसे हो सकते हैं?
इस मामले में जिन्होंने ढिलाई बरती उन पर सख्ती से कार्रवाई की गई है। बाकी में हर समय लोगों के लिए उपलब्ध रहा हूं। इलाज के लिए भी सभी अस्पतालों को कह दिया था कि यदि और कहीं से इंतजाम नहीं होता है तो सबके इलाज का खर्च मैं दूंगा। इससे पहले कोविड में भी जामनगर से ऑक्सीजन की व्यवस्था करने से लेकर लोगों की हर संभव मदद के लिए दिन-रात लगा रहा था। महापौर लगातार कह रहे हैं कि अफसर सुनते नहीं हैं, ये कैसे संभव है?
जो भी अफसर हैं, उन्हें जनप्रतिनिधियों की सुनना ही होगी। घटना को लेकर जो कार्रवाई हुई है, उससे भी स्पष्ट है कि जनप्रतिनिधियों की अवहेलना करके कोई भी इंदौर में पदस्थ नहीं रह सकता। इंदौर के अन्य इलाकों में भी पाइप लाइन पुरानी हो चुकी है?
इसके लिए एक पूरी योजना लेकर आ रहे हैं। इंदौर में जहां भी इस तरह की परेशानी है, उसका त्वरित निराकरण किया जाएगा। गंदे पानी की छोटी से छोटी शिकायत का प्राथमिकता पर निराकरण होगा। कोई भी इसमें जरा भी लापरवाही बरतने वाले अधिकारी-कर्मचारी को बख्शेंगे नहीं।


