कलेक्टर ने फिल्टर प्लांट का किया निरीक्षण:20 साल पुरानी पाइप लाइनों के सर्वे निर्देश; दूषित पानी शिकायतों के लिए कॉल सेंटर शुरू

कलेक्टर नीतू माथुर ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (वीसी) के जरिए जिले के सभी नगर पालिका अधिकारियों को पेयजल की गुणवत्ता बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने अपने-अपने क्षेत्रों में स्थापित पानी की टंकियों की नियमित सफाई सुनिश्चित करने को कहा। कलेक्टर माथुर ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (पीएचई) के माध्यम से पानी की गुणवत्ता की नियमित जांच सुनिश्चित करने पर जोर दिया। निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि सभी पाइप लाइनों की समय-समय पर जांच की जाए और जहां भी लीकेज या तकनीकी खामी मिले, वहां तत्काल सुधार कार्य कराया जाए। नागरिकों को दूषित पानी का वितरण न हो अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि किसी भी परिस्थिति में नागरिकों को अशुद्ध या दूषित पानी का वितरण न हो। दूषित पानी की समस्या के त्वरित निराकरण के लिए जिले में एक कॉल सेंटर स्थापित किया जाएगा। कलेक्टर ने आगामी सात दिनों में सभी पानी वितरण जल स्रोतों की जांच करने और 20 वर्ष से अधिक पुरानी पाइप लाइनों का सर्वेक्षण कर उनकी स्थिति की जानकारी शीघ्र उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। पानी की गुणवत्ता, क्लोरीन की मात्रा और टंकी सफाई संबंधी जानकारी रजिस्टर में दर्ज करने को भी कहा गया है। पानी टंकी और वितरण की नियमित जांच के निर्देश जनप्रतिनिधियों के साथ मिलकर पानी की टंकी और पानी वितरण की नियमित जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। नगर और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को शुद्ध पेयजल और जल भराव आदि के प्रति जागरूक करने के लिए बैठकें आयोजित की जाएंगी। वार्ड प्रभारियों और अमृत मित्र समन्वयकों के साथ बैठक कर साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि पेयजल व्यवस्था में लापरवाही बरतने वाले संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। जनस्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। कलेक्टर ने फिल्टर प्लांट का निरीक्षण भी किया कलेक्टर माथुर ने आलीराजपुर फिल्टर प्लांट का निरीक्षण भी किया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने और नागरिकों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इस दौरान समस्त नगर पालिका अधिकारी एवं अनुविभागीय अधिकारी राजस्व वीसी के माध्यम से जुड़े रहे।

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